विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: बदलता मौसम बना चिंता का विषय, 124 वर्षों में पहली बार टूटा तापमान का रिकॉर्ड
विशेष रिपोर्ट। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्ट ने देश में तेजी से बदल रहे मौसम और पर्यावरणीय असंतुलन की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। विशेषज्ञों के अनुसार कटते जंगल, घटते जलस्तर और बढ़ता प्रदूषण मौसम के संतुलन को लगातार बिगाड़ रहे हैं, जिसका असर देशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
पर्यावरण संस्था सीएसई (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 भारत के इतिहास का आठवां सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि चरम मौसम की घटनाओं के कारण वर्ष 2025 में देशभर में 4,421 लोगों की मौत हुई, जबकि हर आठ में से एक भारतीय किसी न किसी मौसम जनित बीमारी से प्रभावित पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार जून से सितंबर तक का मौसम सामान्य से 0.09 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहा, जबकि अक्तूबर से दिसंबर के दौरान तापमान सामान्य से 0.10 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 राज्यों में 24 घंटे के अधिकतम तापमान ने पिछले 124 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हीटवेव, सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जल संरक्षण अपनाने तथा पर्यावरण को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की गई है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद आवश्यक है। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए आज से ही पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।
News Reporter: Shivam Verma
All India Media Association, Sultanpur, Uttar Pradesh