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मीडिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र में उसकी भूमिका पर प्रश्न

संवाददाता :आर के सिंह
भारत : लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाली मीडिया का एक बड़ा हिस्सा अपने मूल कर्तव्य से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है। लगभग 80-90% मुख्यधारा मीडिया संस्थान सत्ता पक्ष के पक्ष में झुकाव रखते हैं, जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता पर सवाल उठ रहे हैं। जनता से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याओं जैसे बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों और युवाओं के मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलती है।
सत्ता से सवाल पूछने की बजाय चापलूसी और प्रचार को बढ़ावा देना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता की आवाज बनना है, न कि किसी सरकार, दल या पूंजी समूह का प्रवक्ता बनना। कई नागरिक मीडिया की कार्यशैली से असंतोष व्यक्त कर रहे हैं और निष्पक्ष, निर्भीक तथा जनपक्षीय पत्रकारिता की मांग कर रहे हैं। इस स्थिति में मीडिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि वह पुनः जनहित, सत्य और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हो सके।

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