कर्नाटक में 'डीके युग' की शुरुआत, डी.के. शिवकुमार आज शाम 4 बजे लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ
महीनों की सियासी हलचल और कांग्रेस आलाकमान के साथ गहन मंथन के बाद आज कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है, जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता और संकटमोचक डी.के. शिवकुमार आज शाम ठीक 4:05 बजे बेंगलुरु के लोकभवन परिसर स्थित ग्लास हाउस में राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा दिलाए जाने वाले इस शपथ ग्रहण के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और राज्य में एक नए नेतृत्व की शुरुआत होगी, जिसमें आम जनता की सहूलियत को देखते हुए इस भव्य कार्यक्रम को किसी बड़े स्टेडियम के बजाय लोकभवन में बेहद सादगी के साथ आयोजित किया जा रहा है और करीब 2,000 विशेष मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया है।
राजनीतिक गलियारों में चल रही खबरों के मुताबिक, इस पहले चरण के शपथ ग्रहण समारोह में डी.के. शिवकुमार के साथ करीब 10 से 12 वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है, जिसमें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है, जबकि बाकी बचे कैबिनेट मंत्रियों का विस्तार आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य के सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में दो से तीन उपमुख्यमंत्री बनाने के फॉर्मूले पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, जिसमें दलित समुदाय के सबसे वरिष्ठ और दिग्गज नेता जी. परमेश्वर का नाम उपमुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में सबसे आगे चल रहा है। इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पल का गवाह बनने के लिए कांग्रेस आलाकमान के तमाम बड़े दिग्गज बेंगलुरु पहुंच रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल शामिल हैं, और उनके साथ ही देश के अन्य सभी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस अवसर पर मौजूद रहकर विपक्ष की राष्ट्रीय एकजुटता का बड़ा संदेश देंगे। सिद्धारमैया के लंबे कार्यकाल के बाद सत्ता की कमान संभालने जा रहे डी.के. शिवकुमार के सामने अब नए मंत्रिमंडल को सुचारू रूप से चलाने, कयासों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया जैसी युवा आवाजों को कैबिनेट में जगह देने और चुनावी वादों व गारंटियों को जमीन पर उतारने की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी, जिस पर आज शाम 4 बजे पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।