सी एल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित हुई भागवत कथा सप्ताह के प्रथम दिवस भागवत महापुराण के माहात्म्य की हुई अमृतवर्षा।
मुरादाबाद। दिनांक ०२ जून २०२६, मंगलवार
*आत्मानुशीलन से अवतरित होती है भागवत कथा*
सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास अयोध्या के महांत आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज ने शहर के रामगंगा विहार स्थित सी एल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित भागवत कथा सप्ताह के प्रथम दिवस भागवत महापुराण के माहात्म्य की अमृतवर्षा की और भक्तों के अंतःकरण में भगवान के चरणारविन्द का साक्षात्कार कराया।उन्होंने कहा कि
महर्षि वेदव्यास वेद की चारों शाखाओं के इतिहास और पुराण का प्रणयन करके पुरुषार्थ-चतुष्टय की सिद्धि का साधन करके भी शांति का अनुभव नहीं करते।बद्रिका क्षेत्र में अपने आश्रम में बैठकर वह अपनी अपूर्णता का अनुभव करते हैं। देवर्षि नारद उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि मनुष्य बिना भगवत -भक्ति के पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता।धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की आकांक्षा से प्रेरित और प्रवृत्त हुआ मनुष्य कभी सम्यक शांति का अनुभव नहीं कर सकता।रसस्वरूप परमात्मा के रस में निमग्न हो जाना ही भागवत का वास्तविक स्वरूप है इसीलिए शुकदेव परमहंस श्रीमद् भागवत के श्रोताओं को रसिक कहकर आमंत्रित करते हैं।
"पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः"
भक्ति महरानी के प्रार्थना पर ज्ञान-वैराग्य का पोषण करते हुए सनकादि महर्षि ने रसरूप भक्ति का प्रतिपादन किया।
प्रेत हुए धुंधकारी के उद्धार के लिए भी रसरूप भगवान की अविच्छिन्न स्मृति करने वाली भागवत कथा का ही आश्रय गोकर्ण ने लिया।सौनकादि महर्षियों ने सूत जी महाराज से प्रश्न करते हुए कहा है कि आप हमें वह कथा सुनाऐं जिससे सच्चिदानंद भगवान
में हमारी प्रीति प्रगाढ़ हो,इस कथा का सार तत्व भी आचार्य ने उद्भाषित किया।महाराजश्री ने कहा कि श्रीमदभागवत महापुराण में स्पष्ट कहा गया है कि सभी धर्मों का भलीभाँति किया गया आचरण भी यदि भगवान के मंगल रूप लीला-धाम में रति नहीं जगाता तो सब कुछ केवल श्रम-मात्र है।
पुरुषोत्तम मास में चल रही इस कथा सप्ताह के प्रथम दिवस दस लक्षणात्मक महापुराण के माहात्म्य की चर्चा करते हुए गोकर्णोपाख्यान,मंगलाचरण के साथ परीक्षित का जन्म, कलियुग का स्वरूप ,भगवान की शरणागतवत्सलता तथा भीष्म पितामह के द्वारा की गई भगवान की स्तुति आदि कथा प्रसंगों का निरूपण किया गया।
कथा श्रवण के लिए अयोध्या से पधारे महांत अनिल कुमार शरण, महांत अमित कुमार दास, पंडित उमेश दत्त शुक्ल, आचार्य गौरव शुक्ल विशेष रूप से सभागार में उपस्थित रहे।
भागवत कथा सप्ताह-यज्ञ के यजमान शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी, उद्यमी राघव गुप्ता ने सपरिवार उपस्थित होकर व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया।
आसपास के शहरों से आए भक्तों की भारी संख्या भी सभागार में दिखाई पड़ी।
प्रेम मसीह आइमा मीडिया संवाददाता।