ग्राम पंचायत कर्राकोट में विकास कार्य ठप; पानी, बिजली और सफाई व्यवस्था बदहाल, ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन में लगाई गुहार
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बरमकेला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कर्राकोट में बुनियादी सुविधाओं का अकाल पड़ा हुआ है। गांव में पानी, बिजली, नाली और गली सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में ग्रामीण एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी और उदासीनता से त्रस्त होकर अंततः समस्त ग्रामवासियों को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर से न्याय की गुहार लगानी पड़ी है।
ग्रामीणों ने दिनांक 02 जून 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सरपंच, पंच और रोजगार सहायक पर मनमानी का आरोप
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत कर्राकोट के सरपंच, पंच और रोजगार सहायक मिलकर अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनहित तथा ग्राम विकास के कार्यों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव की गलियां, नालियां और बिजली व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल स्थिति में छोड़ दी गई है।
15वें वित्त आयोग की राशि के गबन की आशंका
शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने वित्तीय अनियमितता का एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा 15वें वित्त आयोग से प्राप्त सरकारी राशि का बिना कोई वास्तविक कार्य कराए ही आहरण (निकासी) कर लिया गया है। जब भी ग्रामवासी विकास कार्यों को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों से बात करते हैं, तो उन्हें टालमटोल जवाब मिलता है। वर्तमान में पंचायत के फंड में कोई राशि शेष नहीं बताई जा रही है, जिससे ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और पूरा गांव इस भ्रष्टाचार से बेहद त्रस्त है।
मांग और निष्पक्ष जांच की अपील
शिकायत पत्र के अंत में समस्त ग्रामवासियों ने कलेक्टर महोदय से विनम्र निवेदन किया है कि ग्राम पंचायत कर्राकोट में हुए इन सभी घपलों और बदहाल व्यवस्थाओं की निष्पक्षता से जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि शासन द्वारा जनहित के लिए भेजे गए पैसे का सदुपयोग हो सके और गांव में रुका हुआ विकास कार्य फिर से संभव हो सके।
शिकायतकर्ता ग्रामीण
इस शिकायत पत्र को सौंपने के लिए गांव की महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में पहुंचे थे। पत्र पर प्रमुख रूप से भुनेश्वरी साहू, मीना, वृन्दा, मनोरमा, लक्ष्मी साहू, राजेश्वरी साहू, गोमती, बृजमती, सुशीला साहू, रुकमिणी साहू और दुर्गा सहित समस्त ग्रामवासियों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान मौजूद हैं।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और कर्राकोट के ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के संकट से कब तक निजात मिलती है।