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डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में गूंजी नवजात की किलकारी, चलती ट्रेन में महिला ने दिया पुत्र को जन्म :-

रेलवे कर्मचारियों, महिला यात्रियों और चिकित्सा टीम की तत्परता से सुरक्षित हुआ प्रसव; मां और नवजात दोनों स्वस्थ

डिब्रूगढ़ आने वाली लोकमान्य तिलक टर्मिनस– डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है। महाराष्ट्र से असम के डिब्रूगढ़ की ओर जा रही इस लंबी दूरी की ट्रेन में एक गर्भवती महिला ने चलती ट्रेन के भीतर ही एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।

रेलवे कर्मचारियों, सहयात्रियों और चिकित्सा दल के सामूहिक प्रयासों से प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ, जिससे एक संभावित आपात स्थिति सुखद याद में बदल गई। जानकारी के अनुसार ज्योति चौधरी नामक महिला यात्रा के दौरान अचानक प्रसव पीड़ा से प्रभावित हुईं।

घटना उस समय हुई जब ट्रेन भुसावल और इटारसी रेलवे स्टेशनों के बीच चल रही थी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ट्रेन कंडक्टर एस. पी. फिरके तथा टिकट परीक्षक (टीटीई) अम्बरीश कुमार तिवारी ने तत्काल आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने कोच में एक सुरक्षित स्थान तैयार कराया और रेलवे नियंत्रण कक्ष को तत्काल सूचना देकर चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की। इस दौरान ट्रेन में मौजूद कई महिला यात्रियों ने भी मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए प्रसूता की सहायता की।

सीमित संसाधनों के बावजूद सभी के सहयोग से महिला ने चलती ट्रेन में ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के साथ ही कोच में मौजूद यात्रियों के बीच खुशी और उत्साह का माहौल बन गया।रेलवे प्रशासन ने घटना की सूचना मिलते ही हरदा रेलवे स्टेशन पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेष टीम तैनात कर दी थी। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर चिकित्सा दल ने मां और नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण किया। चिकित्सकों ने दोनों को पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ बताया। यह घटना भारतीय रेलवे की मानवीय सेवा भावना और आपात परिस्थितियों में कर्मचारियों की तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। डिब्रूगढ़ आने वाली इस ट्रेन में जन्मे नवजात की खबर ने यात्रियों के साथ-साथ रेलवे अधिकारियों के बीच भी प्रसन्नता का माहौल बना दिया है।

रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन कंडक्टर, टीटीई और प्रसव में सहायता करने वाली महिला यात्रियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके समय पर किए गए प्रयासों ने मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह घटना साबित करती है कि संकट की घड़ी में सामूहिक सहयोग और मानवीय संवेदनाएं किसी भी चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर सकती हैं। डिब्रूगढ़ से जुड़े इस अनोखे घटनाक्रम की चर्चा अब रेलवे यात्रियों और सोशल मीडिया पर भी हो रही है, जहां लोग रेलवे कर्मचारियों और सहयात्रियों की संवेदनशीलता तथा सेवा भावना की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं।

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