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डंगला गांव में 10 दिवसीय श्रीरामलीला महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन, श्रद्धा और संस्कृति का संगम


द्वारीखाल (पौड़ी गढ़वाल), ग्राम इंगला से रिपोर्ट

ग्राम डंगला में आगामी 02 जून 2026 से 11 जून 2026 तक श्रीरामलीला महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। “भक्ति और एकता का उत्सव – बहन/बेटियों का समर्पण” थीम पर आधारित यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

श्रीरामलीला समिति डंगला द्वारा आयोजित इस महोत्सव में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जाएगा, जो समाज को धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन की प्रेरणा देंगे

रामलीला भारतीय संस्कृति की एक प्राचीन और जीवंत परंपरा है, जिसमें रामायण की कथा का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया जाता है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देने का माध्यम है।

यूनेस्को द्वारा भी रामलीला को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जो इसकी वैश्विक महत्ता को दर्शाता है।

आयोजन अवधि: 02 जून 2026 से 11 जून 2026

स्थान: श्रीराम चरित्र चेतना मंच, डंगला
दिनवार रामलीला मंचन कार्यक्रम:
प्रथम दिवस (02 जून): श्रवण लीला
द्वितीय दिवस (03 जून): राम जन्म
तृतीय दिवस (04 जून): धनुष यज्ञ – सीता स्वयंवर
चतुर्थ दिवस (05 जून): कैकेयी कोप भवन, राम वन गमन
पंचम दिवस (06 जून): भरत मिलाप
षष्ठ दिवस (07 जून): सीता हरण
सप्तम दिवस (08 जून): राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध
अष्टम दिवस (09 जून): अशोक वाटिका
नवम दिवस (10 जून): लक्ष्मण शक्ति
दशम दिवस (11 जून): रावण वध एवं राजतिलक

समिति द्वारा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों एवं आम जनता को इस पावन आयोजन में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और नारी सम्मान का प्रतीक है।

यह आयोजन विशेष रूप से बहनों और बेटियों के सम्मान एवं समर्पण को समर्पित है, जो समाज में सकारात्मक संदेश देने का प्रयास करता है। साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

ग्राम डंगला में आयोजित यह श्रीरामलीला महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

“जहां श्रद्धा, वहां संस्कृति जीवित रहती है” — इसी संदेश के साथ यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए एक प्रेरणादायक अवसर साबित होगा।

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