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रामनगर के UN Veteran नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की चार पुस्तकें अमेरिका में छपकर विश्वभर में पहुँचीं

हरियाणा के सोनीपत जिले के छोटे से गाँव रामनगर
से निकले पूर्व नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव
निम्बार्क ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े
संस्थानों और विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता
नहीं कर सके।

एक गरीब वैष्णव किसान परिवार में जन्मे,
भारतीय सेना में 24 वर्षों तक देश की सेवा करने
वाले और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सिएरा
लियोन तक जाने वाले इस UN Veteran ने
सेवानिवृत्ति के पश्चात 18 वर्षों के अथक शोध
से सनातन वैष्णव बैरागी परम्परा का वह इतिहास
लिखा — जो सदियों से उपेक्षित था।

उनकी चार पुस्तकें अब अमेरिका में प्रकाशित
होकर विश्व के हर कोने में पहुँच चुकी हैं।

यात्रा : बंदूक से कलम तक — एक सैनिक की
आत्मकथा जो बंदूक छोड़कर कलम उठाता है।

रामनगर : 422 वर्षों का अनसुना इतिहास —
एक गाँव का वह इतिहास जो आज तक किसी
पुस्तक में नहीं था।

जगतगुरु निम्बार्काचार्य : सनातन के सूर्य —
निम्बार्क संप्रदाय के संस्थापक के जीवन, दर्शन
और परम्परा पर आधारित सम्पूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ।

महंत बने महाराजा — वैष्णव बैरागी महंतों की
वह गाथा जिन्होंने धर्म की रक्षा हेतु राजसी
वैभव को भी अपना साधन बनाया।

ये पुस्तकें Amazon, Flipkart, Google Play
Books और Notion Press पर हिंदी एवं अंग्रेज़ी
दोनों भाषाओं में हार्डकवर, पेपरबैक एवं Kindle
प्रारूप में उपलब्ध हैं।

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क का यह कहना है —

"मेरा एकमात्र उद्देश्य सनातन वैष्णव बैरागी
परम्परा के उन गुमनाम योद्धाओं और संतों के
इतिहास को पुनर्जीवित करना है जो भारत माँ
के लिए जिए और मरे।"

रामनगर से विश्व तक — यह यात्रा केवल एक
व्यक्ति की नहीं, सनातन परम्परा के पुनर्जागरण
की यात्रा है।

अधिक जानकारी के लिए —
www.nareshswaminimbark.in

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