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* JEE Advanced Result 2026: शुभम कुमार बने टॉपर, कबीर छिल्लर और अर्णव गौतम टॉप 10 में... AIR-1 में कोटा की हैट्रिक *

*कोटा :* विश्व की दूसरी सबसे कठिन परीक्षा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम एडवांस्ड (JEE ADVANCED 2026) का परिणाम घोषित हो गया है. आईआईटी में एडमिशन के लिए होने वाली इस परीक्षा में कोटा का एक बार फिर डंका बजा है. लगातार तीसरी बार कोटा से ऑल इंडिया रैंकर आया है. जेईई एडवांस्ड में जेईई मेन में भी टॉप करने वाले और 100 परसेंटाइल स्कोर बनाने वाले बिहार के गया निवासी शुभम कुमार ने टॉप किया है. शुभम कुमार ने 330 अंक 360 में से प्राप्त किया. शुभम कुमार कोटा से ही कोचिंग कर रहे थे.

कोटा से ऑल इंडिया रैंक वन के साथ दो और सात भी आई है. ऑल इंडिया रैंक वन पर शुभम कुमार हैं तो ऑल इंडिया रैंक दो पर कोटा से ही कोचिंग कर रहे कबीर छिल्लर है. शुभम और कबीर दोनों दोस्त हैं. कोटा के रहने वाले अर्णव गौतम भी सातवीं रैंक के साथ टॉपर बने हैं. कबीर जेईई मेन के टॉपर रहे हैं और जेईई मेन परफेक्ट स्कोर यानी 300 में से 300 अंक लेकर आए थे. साथ ही ऑल इंडिया रैंक 1 लेकर आए थे. हालांकि एडवांस्ड में उनकी एक रैंक नीचे फिसल गई है. उनसे पांच रैंक नीचे ऑल इंडिया रैंक 6 वाले शुभम कुमार टॉपर बन गए हैं. दूसरी तरफ अर्णव गौतम के जेईई मेन में पांचवीं रैंक थी.

*2000 से अब तक 12 टॉपर, लगातार तीसरा टॉपर :* साल 2026 में आईआईटी एंट्रेस जेईई एडवांस्ड में टॉपर बने शुभम कुमार अब तक कोटा से आईआईटी एंट्रेस या इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में यह 12वां टॉपर सामने आया है. साल 2000 से 2026 में इन 28 सालों में 12 बार कोटा से यह टॉपर बना है, जबकि 16 बार देश के अन्य शहर या कस्बे से टॉपर आया है. कोटा से लगातार तीसरा टॉपर यह निकल कर आया है. साल 2024 से लेकर 2026 तक तीनों ऑल इंडिया रैंकर 1 कोटा शहर ने दिए है. जिसमें साल 2024 में वेद लाहोटी 2025 में रजित गुप्ता और साल 2026 में शुभम कुमार ने रिकॉर्ड बनाया है.

*कोटा के सपोर्ट सिस्टम से बना रहा टॉपर :* एलेन कोचिंग संस्थान के निदेशक राजेश माहेश्वरी का कहना है कि उनके संस्थान से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स क्वालीफाई हुए हैं, अभी रिजल्ट आया है जिसका एनालिसिस चल रहा है, लेकिन ऑल इंडिया रैंक वन पर शुभम कुमार लेकर आए हैं. लगातार कोटा ने तीसरी बार यह कारनामा कोटा और उनके संस्थान ने है. अब तक कोटा 12 बार 2000 के बाद ऑल इंडिया टॉपर दे चुका है. ऑल इंडिया रैंक 2 और 6 पर भी उन्हीं के कोचिंग से कोटा में पढ़ने वाले स्टूडेंट है. माहेश्वरी का कहना है कि कोटा से पढ़ रहे बड़ी संख्या में बच्चे टॉपर इस बार भी बने हैं, यह कोटा का औरा ही ऐसा है कि यहां पर आने पर बच्चा पढ़ाई में मशगूल हो जाता है और फैकल्टी और संस्थान के रिसोर्सेस से मेहनत कर कर आगे बढ़ रहा है. यहां स्टूडेंट की मेहनत तो रहती ही है, उसके साथ-साथ कोटा कोचिंग का सपोर्ट सिस्टम बच्चों को आगे ले जाता है. यहां तक की टॉपर तक भी बना देता है, यहां तक कि यहां से निचली रैंक तक भी बच्चे आईआईटी में पहुंचते हैं.

*लक्ष्य था टॉप करना :* शुभम कुमार मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं. कोटा में जहां पर स्टूडेंट दसवीं पास करने के बाद ही आ जाते हैं और आईआईटी एंट्रेस की तैयारी करते हैं, लेकिन शुभम ने 11वीं में गया में ही एडमिशन ले लिया था. उनकी बहन श्रेया आईआईटी पटना से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रही है. शुभम ने अपना गोल आईआईटी बॉम्बे बनाया हुआ था. ऐसे में 11वीं की आधी पढ़ाई के बीच वह कोटा पहुंचे और यहां पर पढ़ाई शुरू कर दी. डेढ़ साल जमकर मेहनत की और ऑल इंडिया रैंक 1 जेईई एडवांस्ड में लेकर आए हैं, विश्व की दूसरी कठिन परीक्षा के टॉपर बने हैं. शुभम के पिता शिव कुमार गया में हार्डवेयर का बिजनेस करते हैं, जबकि उनकी मां कंचन देवी हाउसवाइफ है. वे कोटा में डेढ़ साल तक अकेले रहे हैं, कभी-कभी परिजन यहां पर आकर उन्हें संभालते थे. शुभम सोशल मीडिया से भी दूर नहीं रहते हैं, इसका उचित उपयोग करते हैं. उनका कहना है कि उनका कहना है कि इंजीनियरिंग परीक्षा में केवल फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स ही नहीं राइटिंग स्किल्स और मानसिक श्रम शक्ति काफी काम आती है. वे कोचिंग के अलावा करीब 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी व रिवीजन करते थे.

*पिता के बाद अब बेटा कबीर छिल्लर भी बनेगा आईआईटियन :* ऑल इंडिया रैंक दो लाने वाले कबीर छिल्लर के पिता मोहित भी आईआईटियन है. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक किया है, निजी कंपनी में जॉब करते हैं, मां प्रियंका प्राइवेट स्कूल टीचर हैं. कबीर आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहते हैं, वह भी कंप्यूटर साइंस में इसके अलावा वे यूएसए की कैंब्रिज स्थिति में वर्ल्ड की नंबर-1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से उच्च शिक्षा (रिसर्च) करना चाहते हैं.

कबीर कोटा में अकेले ही रहते थे, उनके पेरेंट्स यहां पर आकर कभी-कभी उन्हें संभालते थे. कबीर का कहना है कि कोटा में उनकी सक्सेस का कारण फैकल्टी का गाइडेंस है. उन्होंने अपने पढ़ाई को छोटे-छोटे टारगेट्स में डिस्ट्रीब्यूशन किया था और नोट्स बनाकर लगातार रिवीजन की आदत डाली. पढ़ाई में एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट को भी बेहतर किया. उनका कहना है कि कांसेप्ट क्लियर होना जरूरी है, टॉपिक को समझाना ज्यादा बेहतर रहता है. लगातार मॉक टेस्ट वह देना और उनका सेल्फ एनालिसिस भी किया.

*शुरू से ही लक्ष्य टॉपर में शामिल होना था- अर्णव गौतम :* ऑल इंडिया रैंक 7 लाने वाले अर्णव गौतम सोशल मीडिया से दूर रहते हैं. उनका कहना है की टॉपर से कंपटीशन से ही फायदा उन्हें मिला है. वह रोज गली क्रिकेट जरूर खेलते है. इससे उनका दिमाग फ्रेश होता था, उनके पिता बुद्धि प्रकाश कोटा विश्वविद्यालय में जियोग्राफी की गेस्ट फैकल्टी हैं, जबकि मां निधि सरकारी टीचर है. छोटा भाई देव अभी कक्षा छह में पढ़ रहा है. उनका मानना है कि कोटा में कंपटीशन ज्यादा है और हेल्दी कंपटीशन से ही विद्यार्थी टॉपर बन रहे हैं. उनका कहना है कि सभी कंसेप्ट को समझना और डाउट्स क्लियर करना सफलता का श्रेय है. उनका कहना है की पढ़ाई में उनका टॉपर शुरू से ही बनना था, क्योंकि आईआईटी बॉम्बे में पढ़ाई करनी है तो टॉप रैंक से जेईई एडवांस्ड को क्रैक करना होगा, उनके जेईई एडवांस्ड में 360 में 314 अंक है.

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