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5 महीने से बंद दिव्यांग GST पोर्टल, जिम्मेदार कौन? उद्योग भवन से कर्तव्य भवन तक भटक रहे लोग


विशेष समाचार रिपोर्ट
देशभर के दिव्यांगजन इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक समस्या से जूझ रहे हैं। दिव्यांग व्यक्तियों को वाहन खरीदने पर GST छूट देने वाली GST Exemption Certificate Scheme (GECS) का पोर्टल पिछले लगभग पाँच महीनों से “Under Maintenance” दिखा रहा है। इसके कारण हजारों आवेदकों की आवेदन प्रक्रिया अधर में लटक गई है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पोर्टल पर किसी जिम्मेदार अधिकारी का नाम, संपर्क नंबर या स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आवेदक अपनी शिकायत लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई लोग उद्योग भवन से कर्तव्य भवन तक भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा।
दिव्यांग आवेदकों का कहना है कि जब वे सहायता के लिए पोर्टल पर दी गई हेल्पडेस्क ईमेल आईडी पर संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो ईमेल तक डिलीवर नहीं होती। कई लोगों को “Email Address Not Available” या मेल फेल होने का संदेश प्राप्त हो रहा है। ऐसे में लोगों के सामने अपनी समस्या रखने का भी कोई माध्यम नहीं बचा है।
स्थानीय आवेदकों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति के लिए भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना आसान नहीं होता, लेकिन जब एक दिव्यांगजन बार-बार अलग-अलग भवनों और विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर होता है, तो उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लोगों का आरोप है कि एक महत्वपूर्ण सरकारी सुविधा का महीनों तक बंद रहना और किसी अधिकारी की जवाबदेही तय न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि यदि पोर्टल पर संबंधित अधिकारियों के नाम और संपर्क विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों, तो कम से कम लोग अपनी समस्या सीधे उनके सामने रख सकें।
इस मामले को लेकर लोगों ने केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री H. D. Kumaraswamy तथा राज्य मंत्री Bhupathi Raju Srinivasa Varma से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदकों का कहना है कि सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण और सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर एक जरूरी पोर्टल का महीनों तक बंद रहना उन दावों पर सवाल खड़े करता है।
दिव्यांगजन और उनके परिवारों की मांग है कि पोर्टल को जल्द से जल्द शुरू किया जाए, हेल्पडेस्क को सक्रिय किया जाए, संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और लंबित मामलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि लोगों को अपने अधिकार और सुविधाएं पाने के लिए दर-दर न भटकना पड़े।

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