राजतालाब थाना पुलिस पर गंभीर आरोप, 6 किशोरों को तीन दिन तक अवैध अभिरक्षा में रखने का दावा
बांसवाड़ा | 29 मई 2026
बांसवाड़ा जिले के राजतालाब थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जिसमें परिजनों और एक अधिवक्ता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि एक प्रकरण में छह विधि से संघर्षरत किशोरों को 24 मई 2026 की शाम पूछताछ के नाम पर घरों के पास से लाकर तीन दिन तक पुलिस अभिरक्षा में रखा गया। इस संबंध में किशोर न्याय बोर्ड, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं।
शिकायत के अनुसार, किशोरों को बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए पुलिस थाने में रखा गया तथा परिजनों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस दौरान किशोरों को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
परिजनों द्वारा प्रस्तुत शिकायत में यह भी कहा गया है कि लगातार अनुरोध के बावजूद संबंधित जांच अधिकारी द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता ने भी लगाए धमकी देने के आरोप
मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शरीक मोहम्मद खान ने जिला बार एसोसिएशन को दिए गए पत्र में आरोप लगाया है कि शिकायत और प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के बाद उन्हें कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकियां दी गईं। अधिवक्ता ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला
शिकायतकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2020 के चर्चित परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले के फैसले का हवाला देते हुए राजतालाब थाने की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी जांच कराने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस थानों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग वाले CCTV कैमरे लगाने तथा फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।
जांच और जवाब का इंतजार
फिलहाल शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। मामले में प्रशासन और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया तथा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध शिकायत पत्रों, दस्तावेजों एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं के दावे हैं। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।