BREAKING NEWS: स्कूलों के लिए असम पुलिस की बड़ी एडवायजरी, बच्चों की प्राइवेसी को लेकर चेताया!
गुवाहाटी: सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर असम पुलिस ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त एडवायजरी (Advisory) जारी की है। पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी और ऑनलाइन शिकारी (Cyber Criminals) सोशल media पर बच्चों की तस्वीरों और निजी जानकारियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
असम पुलिस ने साफ किया है कि इन तस्वीरों का इस्तेमाल AI Morphing (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से छेड़छाड़), CSAM (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल), ग्रूमिंग, सेक्सटॉर्शन, साइबर बुलिंग और आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान की चोरी) जैसे गंभीर अपराधों के लिए किया जा रहा है।
📋 स्कूलों के लिए असम पुलिस की गाइडलाइंस:
तस्वीरों पर रोक: बच्चों की ऐसी तस्वीरें या वीडियो पोस्ट करने से बचें जिससे उनकी आसानी से पहचान हो सके।
सुरक्षित विजुअल्स का इस्तेमाल: हमेशा ग्रुप शॉट्स, पीछे से ली गई तस्वीरें, धुंधले (blurred) चेहरे या इलस्ट्रेशन का ही उपयोग करें।
पर्सनल डेटा शेयर न करें: बच्चों के पूरे नाम, क्लास की डिटेल, आईडी कार्ड, लोकेशन या फोन नंबर जैसी निजी जानकारियां भूलकर भी शेयर न करें।
टैगिंग से बचें: सोशल मीडिया पर बच्चों, उनके माता-पिता या लाइव इवेंट वाले वेन्यू (जगह) को टैग न करें।
रियल-टाइम अपडेट्स पर रोक: स्कूल ट्रिप, कैंप, आउटडोर एक्टिविटी या किसी भी इवेंट की लाइव या रियल-टाइम जानकारी (कि बच्चे इस वक्त कहां हैं) पोस्ट न करें।
सख्त रिव्यू: स्कूल स्टाफ द्वारा पूरी तरह जांच-परख (Review) करने के बाद ही कोई भी पोस्ट पब्लिश करें।
शिकायत पर तुरंत एक्शन: यदि किसी माता-पिता या बच्चे को आपत्ति हो, तो उससे जुड़ा कंटेंट तुरंत हटा दें।
स्टाफ को करें जागरूक: स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों को AI मॉर्फिंग, डिजिटल प्राइवेसी और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक (Sensitise) करें।
💡 नोट: यह एडवायजरी शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education), राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) के सहयोग से जारी की गई है। अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें!
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