कर्नाटक में ऐतिहासिक 'पावर शिफ्ट': राहुल गांधी के हस्तक्षेप और ढाई साल के वादे के बाद सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा
कर्नाटक की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और बेहद सुनियोजित सत्ता परिवर्तन देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु के राजभवन जाकर आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह पूरा घटनाक्रम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस हाईकमान द्वारा सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच तय किए गए ढाई-ढाई साल के रोटेशनल लीडरशिप समझौते की तार्किक परिणति है, जिसे पार्टी आलाकमान ने पूरी प्रामाणिकता के साथ लागू किया है। इस बड़े बदलाव की नींव दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में रखी गई थी, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच बेहद गंभीर चर्चा हुई। इस बैठक के दौरान राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को एक बेहद सम्मानित नेता के रूप में राष्ट्रीय राजनीति और आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के दीर्घकालिक पुनरुद्धार के लिए बड़ी भूमिका संभालने का भरोसा दिया, जिसके बाद सिद्धारमैया ने आलाकमान के फैसले का सम्मान करते हुए बेहद गरिमापूर्ण तरीके से पद छोड़ने पर अपनी सहमति जताई।
सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक आवास पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक ब्रेकफास्ट मीटिंग की और इस ऐतिहासिक पावर शिफ्ट की जानकारी देने के बाद राजभवन का रुख किया, जहां उनके साथ खुद डी.के. शिवकुमार भी मौजूद थे। कांग्रेस पार्टी ने इस सत्ता परिवर्तन के जरिए देश की राजनीति में एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपने पुराने समझौतों और नेताओं से किए गए वादों को पूरी निष्ठा से निभाती है, और यही वजह है कि सिद्धारमैया ने खुद अगले मुख्यमंत्री के तौर पर डी.के. शिवकुमार के नाम का आधिकारिक प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। यह पूरी प्रक्रिया पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अंदरूनी कलह या बगावत को रोकने और आगामी सांगठनिक चुनौतियों से निपटने के लिए राहुल गांधी की कुशल राजनीतिक रणनीति और सूझबूझ का सीधा परिणाम मानी जा रही है, जो अब कर्नाटक कांग्रेस को एक नई दिशा में आगे ले जाएगी।