14 वर्ष जेल में बिताने के बाद आजीवन कारावास को निश्चित अवधि की सजा में बदला जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 𝟐𝟔 मई को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई दोषी 𝟏𝟒 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है, तो अदालत उसके आजीवन कारावास को निश्चित अवधि की सजा में परिवर्तित करने पर विचार कर सकती है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास की सजा का अर्थ यह नहीं है कि अदालतें परिस्थितियों के अनुसार सजा में संशोधन नहीं कर सकतीं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी सजा निर्धारण और रिमिशन से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में यह सिद्धांत पहले से स्थापित है कि लंबे समय तक कारावास भुगत चुके दोषियों के मामलों में न्यायालय मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण से सजा की समीक्षा कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि प्रत्येक मामले के तथ्यों, अपराध की प्रकृति, दोषी के व्यवहार, जेल में बिताए गए समय तथा सुधार की संभावना को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सजा में संशोधन कोई स्वचालित अधिकार नहीं है, बल्कि यह संबंधित परिस्थितियों और न्यायिक संतुलन पर निर्भर करता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन कैदियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो लंबे समय से जेल में बंद हैं और सजा की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में अदालतों को अधिक स्पष्ट दिशा मिल सकती है, जहां दोषी ने लंबी अवधि तक कारावास भोग लिया हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कानून में आजीवन कारावास का अर्थ सामान्यतः जीवनभर की सजा माना जाता है, लेकिन विभिन्न मामलों में अदालतें परिस्थितियों के आधार पर निश्चित अवधि तय करने या रिमिशन संबंधी राहत देने का अधिकार रखती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पूर्व निर्णयों में भी इस सिद्धांत को दोहराया है।
इस फैसले को न्यायिक सुधार और मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की सजा समीक्षा याचिकाओं पर असर पड़ सकता है और संबंधित अदालतें ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपना सकती हैं।
फिलहाल, सुप्रीम 𝐂𝐨𝐮𝐫𝐭 की इस टिप्पणी ने कानूनी और न्यायिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू कर दी है, विशेष रूप से सजा, रिमिशन और कैदियों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर।