बालपुर में जमीनी जंग: एक तरफ सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, दूसरी तरफ उपसरपंच पर 10 लाख की रंगदारी और खुद सरकारी जमीन पर दो मंजिला मकान तानने की शिकायत
प्रशासनिक पेंच: खसरा नंबर 97/1 पर तहसीलदार न्यायालय सरसींवा ने जारी किया स्थगन (Stay) आदेश।
पॉलिटिकल ट्विस्ट: पीड़ितों का आरोप— पूर्व विधायक का भतीजा होने का धौंस दिखाकर उपसरपंच कर रहा लाखों की अवैध उगाही।
बड़ा खुलासा: दूसरों को बेदखल करने की मांग करने वाले उपसरपंच पर खुद खसरा नंबर 2115/1 की सरकारी जमीन पर दो मंजिला अवैध मकान बनाने का आरोप।
सरसींवा / सारंगढ़-बिलाईगढ़:
जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बालपुर में जमीनी विवाद और आपसी रंजिश का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक हड़कंप मचा दिया है। इस पूरे मामले में एक तरफ जहां शासकीय घास मद की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर तहसीलदार का स्टे ऑर्डर सामने आया है, वहीं दूसरी तरफ गांव के ही उपसरपंच पर पद और राजनीतिक रसूख का दुरुपयोग कर ग्रामीणों से लाखों रुपए की अवैध वसूली (रंगदारी) करने का संगीन आरोप लगा है। मंगलवार, 26 मई को दोनों ही पक्षों के दस्तावेज जिला कलेक्टर के 'जन-दर्शन' में पहुंचने के बाद अब यह मामला पूरी तरह गरमा गया है।
पहला पक्ष: सरकारी जमीन और आम रास्ते पर बेजा कब्जे की शिकायत
मामले की शुरुआत ग्राम बालपुर स्थित शासकीय घास मद की भूमि (खसरा नंबर 97/1, रकबा 6.945 हेक्टेयर) से होती है। ग्राम पंचायत बालपुर ने बीते 11 दिसंबर 2025 की बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 15 पारित कर आरोप लगाया था कि पंडरीपाली निवासी टीकाराम (पिता नम्मू खुंटे) द्वारा इस सरकारी जमीन और आम जनता के आवागमन के कच्चे रास्ते पर बलपूर्वक ठेला और मकान निर्माण किया जा रहा है।
इस पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार न्यायालय सरसींवा ने आदेश क्रमांक 53/2026 के तहत विवादित स्थल पर आगामी आदेश तक निर्माण कार्य पर रोक (Stay) लगा दी है और सरसींवा पुलिस व हल्का पटवारी को मौका जांच प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सरपंच रोशन कुर्रे व ग्रामीणों ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर टीकाराम पर विभिन्न गांवों के नाम से फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे कूट रचित दस्तावेज बनाकर शासकीय योजनाओं का गलत लाभ उठाने का भी आरोप लगाया है।
दूसरा पक्ष: उपसरपंच पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, लगा लाखों की रंगदारी का आरोप
तहसीलदार और पंचायत की इस कार्रवाई के तुरंत बाद इस मामले में उस वक्त एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया, जब गांव के ही पीड़ित गरीब परिवारों और सतनामी समाज की महिलाओं ने एकजुट होकर बालपुर के उपसरपंच कैलाश राय (पिता चन्द्रिका राय) के खिलाफ कलेक्टर जन-दर्शन में मोर्चा खोल दिया।
कलेक्टर महोदया को सौंपे गए 5 अलग-अलग लिखित आवेदनों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उपसरपंच कैलाश राय "पूर्व विधायक का भतीजा" है और इसी रसूख की धौंस दिखाकर वह गांव के ही लोगों से अवैध उगाही कर रहा है:
सरिता लहरे ने आरोप लगाया कि उनकी निजी भूमिस्वामी हक की जमीन (खसरा नंबर 2233/2) पर रहने देने के एवज में उपसरपंच 10 लाख रुपए की मांग कर रहा है और राशि न देने पर गंदी गालियां देकर मारपीट व मानसिक प्रताड़ना की गई।
महोतिया लहरे और नवधी लहरे से 1-1 लाख रुपए, संतरा बाई से 20 हजार रुपए और ठेला लगाने वाले टीकाराम खुंटे से 10 हजार रुपए की अवैध मांग की गई। राशि न देने पर घर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पीड़ितों के अनुसार, उपसरपंच द्वारा गांव के लगभग 22 लोगों को इसी तरह डरा-धमकाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
बड़ा काउंटर अटैक: "शिकायत करने वाले उपसरपंच का खुद सरकारी जमीन पर है दो मंजिला अवैध मकान"
उपसरपंच के खिलाफ शिकायत करने पहुंचे पीड़ितों ने प्रशासन के सामने एक और बड़ा खुलासा किया है। पीड़ितों ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि जो उपसरपंच दूसरों पर अतिक्रमण का आरोप लगा रहा है, उसने खुद शासकीय भूमि खसरा नंबर 2115/1 पर अवैध कब्जा करके दो मंजिला आलीशान मकान खड़ा कर लिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि नियम-कानून का मखौल उड़ाने वाले इस रसूखदार उपसरपंच को खुद शासकीय भूमि से तत्काल बेदखल किया जाए।
निष्पक्ष जांच की दरकार
एक ही गांव से निकले इन दो विरोधाभासी और बेहद गंभीर मामलों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जहां एक तरफ सरकारी जमीन को बेजा कब्जे से मुक्त कराना और फर्जी दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ रसूख की धौंस दिखाकर गरीब ग्रामीणों और महिलाओं से लाखों की अवैध वसूली व मारपीट के आरोपों की सत्यता जांचना भी अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर और सरसींवा पुलिस इस रसूख और कूटनीति के खेल में पीड़ितों को कब तक न्याय दिला पाती है।