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'कैलेंडर' बनाम 'करप्शन': क्या रिकॉर्डतोड़ गिरफ्तारियों से सुधरेगा व्यवस्था का ढर्रा?



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

पटना: ​बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।
लेकिन हाल ही में 'निगरानी अन्वेषण ब्यूरो' द्वारा जारी किए गए आँकड़े और उनका नया 'एक्शन प्लान' यह साफ बयां करता है कि अब भ्रष्टाचारियों के दिन अच्छे नहीं रहे।

सरकारी दफ्तरों में 'टेबल के नीचे से' काम कराने के आदी हो चुके लोकसेवकों पर निगरानी ने इस बार बकायदा कैलेंडर बनाकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' शुरू की है।
जून तक 80 भ्रष्ट लोकसेवकों को रडार पर लेने का लक्ष्य और मई तक ही 55 को रंगे हाथों दबोच लेना, ब्यूरो की प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

​आँकड़ों की बाजीगरी या वाकई बदलाव?
​निगरानी ब्यूरो इस साल हर महीने औसतन 12-13 भ्रष्ट अधिकारियों को दबोच रहा है।
25 मई तक ही 24 लाख से अधिक की घूस राशि बरामद की जा चुकी है।
आँकड़े बताते हैं कि यदि यही रफ्तार रही, तो वर्ष 2009 का 74 मामलों का 'सर्वकालिक रिकॉर्ड' इस जून में ध्वस्त हो जाएगा।

​सवाल यह उठता है: क्या रिकॉर्ड संख्या में प्राथमिकियाँ दर्ज होना और अधिकारियों का पकड़ा जाना सिर्फ ब्यूरो की मुस्तैदी है, या यह इस बात का सबूत है कि नीचे से लेकर ऊपर तक की व्यवस्था में भ्रष्टाचार कैंसर की तरह फैल चुका है?

​निश्चित रूप से, महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार का यह कहना कि "ट्रैप कांडों से लेकर कोर्ट ट्रायल तक की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है", जनता में एक विश्वास जगाता है।
भ्रष्टाचारियों को केवल पकड़ना काफी नहीं है, उन्हें अदालत से सजा दिलाना असली कामयाबी होगी, ताकि अन्य लोकसेवकों में कानून का खौफ पैदा हो।

​जनता की भागीदारी ही असली हथियार
​इस पूरे अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू है—निगरानी ब्यूरो द्वारा आम जनता से सीधे जुड़ने का प्रयास। ब्यूरो ने मोबाइल, व्हाट्सएप और ई-मेल आईडी जारी कर सीधे जनता को 'व्हिसलब्लोअर' बनने का न्योता दिया है।
भ्रष्टाचार तब तक खत्म नहीं हो सकता, जब तक आम नागरिक रिश्वत देने को मजबूरी मानकर चुप रहता है।
​निष्कर्ष
​यह 'निगरानी' का बढ़ता पहरा स्वागत योग्य है। लेकिन ब्यूरो को यह भी ध्यान रखना होगा कि केवल 'मछलियों' (छोटे कर्मचारियों) को पकड़ने से ढांचागत सुधार नहीं होगा; नजर 'मगरमच्छों' पर भी रखनी होगी।
जब तक बड़े अधिकारियों और नीति-निर्माताओं पर इस कैलेंडर के तहत गाज नहीं गिरेगी, तब तक सचिवालय से लेकर ब्लॉक मुख्यालयों तक की फाइलों से रिश्वत की गंध साफ नहीं होगी।
उम्मीद की जानी चाहिए कि जून तक बनने वाला यह 'नया रिकॉर्ड' सिर्फ कागजी आँकड़ा नहीं, बल्कि बिहार की प्रशासनिक शुचिता की एक नई शुरुआत साबित होगा।
​शिकायत दर्ज कराने के माध्यम :
​यदि आपसे कोई सरकारी सेवक रिश्वत मांगता है, तो आप इन माध्यमों पर निगरानी ब्यूरो से संपर्क कर सकते हैं:
​मोबाइल: 7765953261
​व्हाट्सएप: 9473494167
​ई-मेल: spvig-bih@nic.in

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