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संतुलित नीतियों से ही बचेगा पारंपरिक आभूषण उद्योग और लाखों कारीगरों का रोजगार: विनोद वर्मा

पटना / बिहार: भारत का आभूषण उद्योग केवल विलासिता (Luxury) के उपभोग का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के सबसे बड़े पारंपरिक, रोजगार-आधारित इकोसिस्टम में से एक है। यह बात आभूषण वर्ल्ड के प्रधान संपादक और स्वर्णकार समाज बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद वर्मा ने हाल ही में आभूषण उद्योग के विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) और जमीनी स्तर के कारीगरों के साथ हुई चर्चा के दौरान कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह क्षेत्र देश के लाखों कारीगरों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और पारिवारिक व्यवसायों की आजीविका का मुख्य आधार है।

बाजार की वर्तमान स्थिति पर चिंता: विनोद वर्मा जी ने बताया कि सोने के आयात, बुलियन की कीमतों और बाजार की धारणाओं में हाल के बदलावों के कारण बिहार सहित देश के कई क्षेत्रीय बाजारों में उपभोक्ता बहुत सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। हमारे छोटे जौहरी, कारीगर, पॉलिश कर्मचारी, डिजाइनर और हॉलमार्किंग इकाइयाँ पूरी तरह से बाजार की स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास पर निर्भर हैं। यदि बाजार में अनिश्चितता का माहौल रहता है, तो इसका सीधा असर इस पूरी सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

सोना सिर्फ संपत्ति नहीं, सामाजिक सुरक्षा है : चर्चा के दौरान उन्होंने आभूषण क्षेत्र के सामाजिक पहलू को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत में सोना केवल एक निवेश या संपत्ति नहीं है। यह हमारे पारिवारिक परंपराओं, ग्रामीण बचत, सामाजिक सुरक्षा और पीढ़ियों पुरानी शिल्प कौशल से गहराई से जुड़ा हुआ है।" इस पूरे इकोसिस्टम को जीवंत रखने के लिए नीतिगत स्तर पर बाजार में स्थिरता और विश्वास बहाल करना बेहद आवश्यक है।

संतुलित नीतियों की आवश्यकता: AIMA Media से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक कला और MSME से जुड़े व्यापारिक समुदायों की सुरक्षा के लिए सरकार और उद्योग के बीच नीतिगत संवाद (Policy Communication) को संतुलित रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा। आभूषण क्षेत्र को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व वाली बचत संस्कृति और टीयर-2 और टीयर-3 शहरों की आर्थिक ताकत को मजबूत करने में अपनी निरंतर भूमिका निभाते रहना चाहिए।

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