logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

गीत और नृत्य के साथ खाटूश्यामजी के मंदिर,पहुंची महिलाएं।

छबड़ा:भुवाखेड़ी ग्राम पंचायत मुख्यालय से 1 किलोमीटर दूर सादली की पहाड़ी पर खाटूश्याम गो शाला के निकट,नहर किनारे नव निर्माणाधीन,खाटूश्यामजी मन्दिर​भुवाखेड़ी सहित ग्रामीण अंचलों में इन दिनों भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार को भुवाखेड़ी की महिलाओं ने झुलस के साथ नाचते,गाते नव निर्माणाधीन बाबा खाटूश्याम के दर्शन किये,स्थानीय रूप से ओशो आशीष ध्यान केंद्र के संचालक स्वामी ध्यान गगन ने बताया कि अधिक मास में ग्रामीण अंचलों में उमड़ा आस्था का सैलाब।इन दिनों पवित्र अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर ग्राम भुवाखेड़ी की महिलाओं के एक दल ने स्थानीय प्राचीन पहाडी पर पहुँचकर बाबा खाटूश्यामजी के दर्शन-पूजन किए।इस अवसर पर महिलाएं डीजे के ऊपर चल रहे भजनों पर नृत्य करते हुए पहाड़ी पर स्थित भैरव नाथ की मूर्ति पर पहुंची अपनी मनोती अनुसार पूजन,अर्चन कर भजन ,गीत गाकर देवताओं के दर्शन किये।​भजनों की गूंज और 'हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा' के जयकारों के साथ महिलाओं ने नव निर्माणाधीन बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाई और गाँव की खुशहाली, सुख-समृद्धि की कामना की। इस यात्रा को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया।स्थानीय ग्रामीण एस. एल.नागर के अनुसार
​### अधिक मास में दान और स्नान का विशेष महत्व है।​हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार,तीन साल में एक बार आने वाले 'अधिक मास' (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) का आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है।इस पूरे महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनंत गुना होकर मिलता है।
​"गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपीवल्लभम्। विष्णुं जिष्णुं जगन्नाथं राधिकाधारमं हरिम्॥"
अर्थात: इस पूरे माह में भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की आराधना करने से जीवन के सभी पापों का नाश होता है।​इस पवित्र महीने में दो चीजों को सबसे उत्तम माना गया है:
*​पवित्र स्नान का महत्व:*
अधिक मास में सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करने का विधान है। माना जाता है कि इस माह में नियमित स्नान करने से कायिक, वाचिक और मानसिक पापों से मुक्ति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी फलदायी होता है।
*​महादान का फल:*
इस महीने में किए गए दान को 'महादान' की श्रेणी में रखा गया है। विशेषकर दीपदान,अन्न दान,वस्त्र दान और मालपुए का दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इस समय किया गया एक छोटा सा दान भी अक्षय (जिसका कभी क्षय न हो) पुण्य लेकर आता है।
​भक्ति और सेवा का उत्तम संयोग
​भुवाखेड़ी की महिलाओं ने बताया कि बाबा खाटूश्यामजी के दर्शन के साथ-साथ उन्होंने इस पवित्र महीने के नियम के अनुसार गरीबों को अन्न और वस्त्र दान कर पुण्य लाभ भी कमाया। ग्रामीण क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि अधिक मास में तीर्थ यात्रा और दर्शन करने से पूरे परिवार पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है।​इस यात्रा में गाँव की प्रमुख महिलाओं सहित कई श्रद्धालु शामिल रहे, जिन्होंने पूरी यात्रा को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
​- ब्यूरो रिपोर्ट

0
12 views

Comment