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प्रतापगढ़ जिला अस्पताल: नई बिल्डिंग में भ्रष्टाचार की 'सीलन', चंद महीनों में ही उखड़ने लगा प्लास्टर और टाइल्स

प्रतापगढ़। करोड़ों रुपये की लागत से बने जिला अस्पताल के नए भवन की सुदृढ़ता और दावों की पोल खुलने लगी है। अस्पताल की नई बिल्डिंग, जिसे क्षेत्र के मरीजों को आधुनिक और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए तैयार किया गया था, अब खुद 'बीमार' नजर आ रही है। घटिया निर्माण सामग्री और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा यह है कि उद्घाटन के कुछ ही समय बाद भवन की दीवारें और टाइल्स टूटने लगी हैं।
खिड़कियों के पास से गिरा प्लास्टर, लटक रही हैं टाइल्स
ताजा तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अस्पताल वार्ड की खिड़की के पास का प्लास्टर भरभरा कर गिर चुका है। पूरी दीवार की कंक्रीट बाहर आ गई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण के समय सीमेंट और मौरंग के अनुपात में भारी गड़बड़ी की गई है।
यही नहीं, खिड़की के ठीक नीचे लगी सफेद टाइल्स भी दीवार की पकड़ छोड़ चुकी हैं और बाहर की तरफ झुक गई हैं। इस गैप के कारण कभी भी पूरी टाइल नीचे गिर सकती है, जिससे वहां आने-जाने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों या ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को गंभीर चोट आ सकती है।
पहली बारिश और सीलन से खुली पोल
स्थानीय लोगों और अस्पताल में मौजूद तीमारदारों का कहना है कि खिड़कियों के पास वॉटरप्रूफिंग न होने और घटिया काम के कारण सीलन अंदर आ रही है। इसी सीलन ने पूरी दीवार को खोखला कर दिया है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने बजट ठिकाने लगाने के चक्कर में मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया।
मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे
जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज अपने इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में वार्डों के अंदर इस तरह दीवारों का टूटना और टाइल्स का लटकना किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है। अगर समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई, तो कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
मुख्य बिंदु और जनता के सवाल:
मानकों की अनदेखी: आखिर किसके शह पर नई बिल्डिंग में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया?
जांच की मांग: क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस घटिया निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी ठेकेदार और इंजीनियरों पर कार्रवाई करेगा?
सुरक्षा का संकट: वार्डों में भर्ती मरीजों के सिर पर मंडराते इस खतरे को हटाने के लिए तत्काल मरम्मत कार्य कब शुरू होगा?
इस मामले में अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और अस्पताल के आला अधिकारी कब इस पर संज्ञान लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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