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जब बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के एक आह्वान पर 5 लाख किसानों ने दिल्ली के बोट क्लब को घेर लिया


बात साल 1988 की है, जब दिल्ली के बोट क्लब पर एक ऐसा नजारा दिखा जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। कल्पना कीजिए, देश की राजधानी का दिल कहे जाने वाले इलाके में अचानक चारों तरफ से लाखों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आने लगती हैं और देखते ही देखते 5 लाख किसान वहाँ अपना डेरा जमा लेते हैं। इस महा-आंदोलन के पीछे ताकत थी सिर्फ एक नाम की—किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत! उस समय केंद्र में राजीव गांधी की बेहद शक्तिशाली सरकार थी, जिसने किसानों को भगाने के लिए बोट क्लब की बिजली और पानी तक काट दी। लेकिन बाबा टिकैत के किसान कहाँ मानने वाले थे।

कड़ाके की ठंड में वहीं सड़कों पर चूल्हे जलने लगे, हुक्के गुड़गुड़ाने लगे और पूरा बोट क्लब एक गंवई मेले में बदल गया। सात दिनों तक दिल्ली पूरी तरह ठप रही और आखिरकार वही हुआ जो इतिहास में अमर हो गया; उस समय की सबसे ताकतवर सरकार को घुटने टेकने पड़े और किसानों की सभी मांगें माननी पड़ीं। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि जब देश का अन्नदाता अपने हक के लिए एक हो जाता है, तो दिल्ली के बड़े से बड़े सिंहासन को भी झुकना ही पड़ता है।

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