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जवान के न्याय के लिए सिस्टम से भिड़े ITBP कमांडेंट गौरव प्रसाद, कानपुर में कमिश्नर ऑफिस तक पहुँचे 50 कमांडोज

Indo-Tibetan Border Police के कमांडेंट गौरव प्रसाद इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह है अपने जवान विकास सिंह के लिए उनका खुलकर खड़ा होना। बताया जा रहा है कि जब जवान की माँ को न्याय दिलाने के लिए लगातार गुहार लगाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं हुई और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब कमांडेंट गौरव प्रसाद ने चुप रहने के बजाय सीधे मोर्चा संभाल लिया।

जानकारी के अनुसार, अपने जवान की पीड़ा को देखते हुए कमांडेंट गौरव प्रसाद करीब 50 कमांडोज के साथ कमिश्नर ऑफिस पहुँच गए। इस कदम ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया। आमतौर पर सुरक्षा बलों के अधिकारी विभागीय नियमों और अनुशासन के दायरे में रहकर काम करते हैं, लेकिन इस मामले में एक अधिकारी ने अपने अधीनस्थ जवान के दर्द को प्राथमिकता देते हुए खुलकर आवाज उठाई।

यह मामला सिर्फ एक FIR या प्रशासनिक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उस संवेदनहीन व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभरा, जहाँ एक जवान को अपनी माँ के लिए न्याय मांगने में संघर्ष करना पड़ा। लोगों का कहना है कि अगर कमांडेंट गौरव प्रसाद इस तरह सामने नहीं आते, तो संभवतः यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह दबकर रह जाता।

सोशल मीडिया पर भी लोग कमांडेंट की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे “अपने जवानों के प्रति सच्ची जिम्मेदारी” बताया, तो कई ने कहा कि देश को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो सिर्फ कुर्सी और नियमों तक सीमित न रहकर इंसानियत और न्याय के लिए भी खड़े हों।

हालांकि कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को विभागीय अनुशासन और नियम-कायदों के नजरिए से भी देख रहे हैं, लेकिन आम जनता के बीच यह संदेश साफ गया है कि जब सिस्टम सुनना बंद कर दे, तब किसी जिम्मेदार अधिकारी का साहस ही पीड़ित को उम्मीद देता है।

कमांडेंट गौरव प्रसाद का यह कदम अब केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं, बल्कि वर्दी के भीतर छिपी संवेदनशीलता, नेतृत्व और अपने जवानों के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल बनता जा रहा है। देशभर में लोग उन्हें सलाम कर रहे हैं और कह रहे हैं कि “ऐसे अधिकारी ही जवानों का मनोबल बढ़ाते हैं।”

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