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जनहित के मुद्दों का मजाक नहीं, समाधान होना चाहिए - धीरज रमौल

सिरमौर। हाल ही में मतदान केंद्रों पर भीषण गर्मी के बीच जनता की सुविधाओं को लेकर उठाई गई आवाज़ पर कुछ लोगों द्वारा “एसी लगवा दो” जैसे मजाकिया कमेंट किए गए। यह विषय किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की जनता की सुविधा और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
कड़कती धूप में घंटों लाइन में खड़े रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और दूर-दराज़ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति जनता की मूलभूत सुविधाओं — जैसे छाया, पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था और प्राथमिक उपचार — की बात करता है, तो उसका मजाक उड़ाना एक बुद्धिमान और संवेदनशील समाज को शोभा नहीं देता।
समाजसेवी धीरज रमौल द्वारा उठाई गई यह मांग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और प्रदेशवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाई गई आवाज़ है। लोकतंत्र में जनता की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी होती है।
यह मांग कभी भी “एसी लगाने” जैसी विलासिता की नहीं थी, बल्कि न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की थी, ताकि भीषण गर्मी में कोई बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति या आम मतदाता परेशानी का शिकार न हो।
हमें समझना होगा कि समाज में सकारात्मक सोच और जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा ही विकास की पहचान होती है। यदि कोई व्यक्ति जनता की समस्याओं को सामने लाता है, तो उसे प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि उसका उपहास उड़ाना चाहिए।
धीरज रमौल ने कहा कि
“जनता की तकलीफ को समझना और उसके लिए आवाज़ उठाना हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। हमें मजाक नहीं, बल्कि समाधान और संवेदनशीलता की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहिए।”

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