*हाईकोर्ट फैसले के बाद भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को पहली महाआरती एवं दिनभर पूजा हुई*
*हाईकोर्ट फैसले के बाद भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को पहली महाआरती एवं दिनभर पूजा हुई*
*बदनावर - धार :-AIMA Social Media Activists/Journalist राजू गजभिये*
हाईकोर्ट फैसले के बाद भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को पहली महाआरती एवं दिनभर पूजा हुई , मुस्लिम समाज ने घरों में अदा की नमाज
धार में कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों समुदायों ने दिखाई शांति और सौहार्द की मिसाल
माननीय हाईकोर्ट के हालिया निर्णय के बाद शुक्रवार को भोजशाला परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। फैसले के बाद पहली बार हिंदू समाज द्वारा भोजशाला में विधिवत पूजा-अर्चना, भजन एवं महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न होती रहीं।वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज ने भी संयम और सामाजिक सौहार्द का परिचय देते हुए जुमे की नमाज को लेकर अलग निर्णय लिया। समाज के प्रतिनिधियों ने विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर अपने-अपने घरों में नमाज अदा करने की घोषणा की।मुस्लिम समाज के सदर एवं शहर काजी ने कहा कि वे माननीय हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, हालांकि निर्णय से पूर्ण संतुष्टि नहीं होने के कारण उन्होंने न्याय की उम्मीद में माननीय सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। उन्होंने कहा कि समाज कानून और संविधान पर भरोसा रखता है तथा शांति और भाईचारे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।इधर सुबह से ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान एवं महाआरती के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने भोजशाला पहुंचकर दर्शन किए।संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों एवं भोजशाला परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई।प्रशासन द्वारा लगातार दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की जाती रही, जिसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला। पूरे दिन कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और नगर में सामाजिक सौहार्द कायम रहा।
पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धार शहर ने एक बार फिर शांति, संयम और भाईचारे की मिसाल पेश की है।
आदोलन के वे तीन चेहरे , जिनके बलिदान से धार भोजशाला का इतिहास आस्था , बलिदान से
गौरान्वित हुआ । इसमें टांडा के अंतरसिंह , पंचघाटी निवासी लक्ष्मन सिंह एवं अमेझेरा के बन सिंह इनकी स्मृतियां भी जीवित हो उठी ।