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बिहार में 'डबल विकेट' हॉल: "सासाराम में करप्शन पर निगरानी का सर्जिकल स्ट्राइक, 3 लाख घूस लेते CO और उनका सहायक गिरफ्तार!"



​विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

सासाराम/पटना:
बिहार में नीतिश कुमार सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को आज धरातल पर एक बड़ी कामयाबी मिली है।
रोहतास जिले के सासाराम में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने एक ही दिन में, एक ही शहर में महज कुछ दूरी के फासले पर भ्रष्टाचार के दो बड़े किलों को ढहा दिया है।

इनमें सबसे बड़ी कार्रवाई सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार और उनके निजी सहायक सोनू कुमार के खिलाफ हुई है, जिन्हें 3,00,000 रुपये (तीन लाख) की मोटी घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

​पूरा मामला और निगरानी का चक्रव्यूह,
​निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (संख्या 0-64/2026) के अनुसार, भ्रष्टाचार का यह खेल खुद अंचल कार्यालय के भीतर चल रहा था।
सासाराम अंचल के ही एक राजस्व कर्मचारी (परिवादी) राकेश कुमार ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

​शिकायत में आरोप था कि अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार द्वारा प्रत्येक दाखिल-खारिज (Mutation) के एवज में 50,000 रुपये और एक विशेष दाखिल-खारिज वाद (सं0-4499/2025-26) को निष्पादित करने के लिए कुल 8,00,000 (आठ लाख) रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।

घूस न देने पर काम रोकने की मजबूरी खड़ी कर दी गई थी।

​ट्रैप ऑपरेशन:
रंगे हाथों दबोचे गए साहब,
​निगरानी ब्यूरो ने जब गोपनीय तरीके से इस शिकायत का सत्यापन कराया, तो रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाया गया।
इसके तुरंत बाद पुलिस अधीक्षक (निगरानी) के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार-I के नेतृत्व में एक विशेष 'धावादल' (Trapping Team) का गठन किया गया।
​22 मई 2026 को जैसे ही जाल बिछाया गया, वैसे ही सासाराम के बेदा, मोरसराय स्थित सीओ के निजी/किराए के आवास पर रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 3,00,000 रुपये का लेन-देन हुआ।
सीओ साहब अपने निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार के माध्यम से यह रकम समेट रहे थे।
ठीक इसी वक्त निगरानी की टीम ने धावा बोलकर दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया। रिश्वत की पूरी रकम मौके से बरामद कर ली गई।

​प्रशासनिक महकमे में हड़कंप और जनता में संतोष
​इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद रोहतास जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।

सासाराम अंचल कार्यालय पहले भी विवादों में रहा है (जहां कुछ समय पहले एक डेटा एंट्री ऑपरेटर भी घूस लेते पकड़ा गया था), लेकिन सीधे अंचलाधिकारी (CO) स्तर के अधिकारी का इस तरह दबोचा जाना यह दिखाता है कि बिहार में नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।

​गिरफ्तार अभियुक्तों को पूछताछ के बाद पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

​: जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं,
​जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) के नाम पर बिहार के अंचल कार्यालयों में आम जनता और छोटे कर्मचारियों का शोषण कोई नई बात नहीं है।

लेकिन जब एक ज़िम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी (CO) खुद लाखों रुपये की डील करने लगे, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?

निगरानी ब्यूरो की यह त्वरित और गोपनीय कार्रवाई सराहनीय है।
सासाराम में इसी दिन सिविल सर्जन कार्यालय के एक लिपिक को भी 20 हजार लेते पकड़ा गया है, जिससे साफ है कि जिला स्तर पर भ्रष्टाचार चरम पर है।

सरकार को केवल इन 'ट्रैप्स' पर निर्भर रहने के बजाय अंचल कार्यालयों की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल रूप से पूरी तरह जवाबदेह बनाना होगा, ताकि कोई 'आकाश रौनियार' फिर किसी का हक न मार सके।

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