कविता : वंदे मातरम्
💥वंदे मातरम्!
तेरी माटी की सौंधी खुशबू
अब भी मेरे मन में बसती है,
तेरे खेतों की हरियाली
आशा की दीपशिखा-सी हँसती है।💥
💥तेरी नदियाँ गाती हैं गीत,
तेरे पर्वत प्रहरी बन खड़े,
तेरी वाणी में वेदों की गूँज,
तेरे आँचल में सपने बड़े।🌛
🌟वंदे मातरम्!
हे जननी! तुझे प्रणाम,
तेरे चरणों में यह जीवन,
तेरे नाम मेरा हर काम।💫
🌛जब सूरज उगता पूरब से,
सोने-सी धरती चमक उठे,
कण-कण में तेरी महिमा झलके,
हर दिल में नव चेतना फूटे।✨
🩸तेरे मंदिर, तेरी मस्जिद,
तेरे गुरुद्वारे, गिरजाघर,
सबमें बसता एक ही संदेश—
प्रेम रहे इस धरा के अंदर।🩸
🌄कभी यहाँ बुद्ध की करुणा,
कभी नानक की वाणी गूँजी,
कभी कबीर ने प्रेम सिखाया,
कभी मीरा की भक्ति पूजी।🌄
💖तेरी गोद में जन्मे वीर,
जिन्होंने हँसकर प्राण दिए,
स्वाधीनता के दीप जलाकर
अंधियारे के बंधन तोड़ दिए।💖
💗कहीं भगत की ज्वाला जलती,
कहीं गाँधी का सत्य अमर,
कहीं सुभाष का रणघोष सुनाई दे,
कहीं झाँसी वाली रानी निर्भय।💗
🌟वंदे मातरम्!
तेरी शान में झुके गगन,
तेरे मान में झूमे पवन,
तेरे सम्मान में गाए सागर
अपना अनंत अमृत-गान।🌟
🎈तेरे किसान का पसीना
धरती को स्वर्ग बनाता है,
तेरे श्रमिक का श्रम हर दिन
नया इतिहास रच जाता है।🎈
💫तेरे सैनिक सीमा पर
जब सीना तान खड़े रहते,
हम चैन की नींदें सोते,
वे आँधी में दीपक बन जलते।💫
💥हे मातृभूमि!
तेरे आँचल की छाया में
हर धर्म और हर जाति मिले,
भाषाएँ चाहे अलग-अलग हों,
दिल सबके एक साथ खिलें।💥
🎈ना द्वेष रहे, ना भेद रहे,
ना मन में कोई दीवार उठे,
भारत माँ के लाल सभी
प्रेम की नई मशाल उठाएँ।🎈
💖वंदे मातरम्!
तेरी जय का गान करें,
तेरे गौरव का मान करें,
जब तक साँसें चलती जाएँ
तुझ पर अपना बलिदान करें।💖
💖तू गंगा की निर्मल धारा,
तू हिमगिरि का ऊँचा मान,
तू तुलसी की पावन चौखट,
तू वीरों का अमर अभियान।💖
💥तेरे चरणों की धूल भी
मेरे लिए है स्वर्ण समान,
हे भारत माँ! तुझसे बढ़कर
नहीं जगत में कोई स्थान।💥
🙏वंदे मातरम्!
वंदे मातरम्!
जन-जन का यह पावन स्वर—
तेरी महिमा अमिट रहे,
जब तक चमके सूरज-चाँद,
भारत तेरा नाम अमर।🙏