राहुल अध्ययन केन्द्र में सुमित्रानंदन पंत जयंती व विपिन चंद्र पाल स्मृति दिवस मनाया गया
मधुपुर, 20 मई: स्थानीय राहुल अध्ययन केन्द्र में प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती एवं स्वतंत्रता सेनानी विपिन चंद्र पाल की स्मृति दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उपस्थित लोगों ने दोनों विभूतियों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मौके पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव एवं कलमकार धनंजय प्रसाद ने विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य में सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में जाना जाता है। शुरुआती दौर में वे प्राकृतिक सौंदर्य और नारी स्वतंत्रता के पक्षधर कवि के रूप में सामने आए। उनकी रचनाओं में भाषा की समृद्धि, संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध स्पष्ट रूप
से दिखाई देता है। उनकी प्रमुख कृतियों में 'चिदंबरा', 'उच्छ्वास', 'वीणा', 'गुंजन' और 'लोकायतन' शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पंत की 60 वर्षीय साहित्यिक यात्रा को मुख्यतः तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। वर्ष 1916 से 1935 तक का काल छायावाद, 1935 से 1945 तक का काल
प्रगतिवाद तथा 1945 से 1977 तक का काल अध्यात्मवाद के रूप में जाना जाता है। इस दौरान उनकी 'युगांत', 'ग्राम्या' और 'गुणवाणी' जैसी काव्य कृतियां प्रकाशित हुईं। उन्होंने गेय और अगेय दोनों विधाओं में अपनी लेखनी का लोहा मनवाया। साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्मभूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा सोवियत रूस नेहरू सम्मान से सम्मानित किया गया।
धनंजय प्रसाद ने कहा कि विपिन चंद्र पाल स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक और प्रखर वक्ता थे, जिन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौके पर उपस्थित अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
संवाददाता, पारसनाथ एक्सप्रेस अखबार