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दिल्ली के कार्यक्रम के विरोध में 23 मई को बिरसा चौक पर होगा सांकेतिक प्रदर्शन, सरना धर्म कोड को लेकर उठी आवाज

जमशेदपुर: विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने 24 मई 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले “जनजाति सांस्कृतिक समागम” का विरोध करने की घोषणा की है। संगठनों का आरोप है कि यह कार्यक्रम आदिवासी समाज के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है और इसे भाजपा एवं आरएसएस समर्थित विचारधारा के तहत आयोजित किया जा रहा है।

इसी के विरोध में शनिवार 23 मई को शाम पांच बजे साकची स्थित बिरसा चौक में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजकों ने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से सरना धर्म कोड सहित अपनी स्वतंत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की संवैधानिक मान्यता की मांग करता रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीर पहल नहीं कर रही है।

संगठनों ने कहा कि आदिवासी संस्कृति को केवल नृत्य, पोशाक और मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि समुदाय आज भी जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, वनाधिकार, शिक्षा, बेरोजगारी और स्थानीय भाषा संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। उनका आरोप है कि बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए आदिवासी समाज की वास्तविक मांगों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आदिवासी पहचान केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति आधारित जीवनशैली, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और अलग धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, वनाधिकार कानून और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण जैसे मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग की।

संगठनों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र-युवाओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और आम नागरिकों की भागीदारी होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन को पूर्व सूचना देते हुए विधि-व्यवस्था बनाए रखने की मांग भी की गई है।

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