उत्तराखंड में बढ़ता बिजली संकट: रिकॉर्ड मांग के दबाव में सिस्टम, गर्मी और इंडक्शन चूल्हों ने बढ़ाई चुनौती
Uttarakhand Power Corporation Limited (UPCL) के सामने इस बार गर्मियों में बिजली आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी, एसी-कूलर का बढ़ता इस्तेमाल और घरों में तेजी से बढ़ रहे इंडक्शन चूल्हों के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर की ओर पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि उत्तराखंड तीन साल पुराने अधिकतम बिजली खपत के रिकॉर्ड को तोड़ने के करीब पहुंच चुका है।
देहरादून समेत मैदानी इलाकों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर पहले से ज्यादा महसूस किया जा रहा है। इसी वजह से घरेलू बिजली खपत में अचानक उछाल आया है। UPCL के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में एक मई को जहां बिजली की मांग करीब 4 करोड़ यूनिट थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 6 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। वर्ष 2023 में प्रदेश की अधिकतम मांग 6.6 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्मी का यही असर जारी रहा तो यह रिकॉर्ड जल्द टूट सकता है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस बार सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल ने भी बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। UPCL अधिकारियों का कहना है कि इंडक्शन आधारित खाना पकाने की बढ़ती प्रवृत्ति से करीब 100 मेगावाट अतिरिक्त भार सिस्टम पर आया है। एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों और उपलब्धता की दिक्कतों के कारण बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जिसका सीधा असर बिजली मांग पर दिखाई दे रहा है।
UPCL के प्रबंध निदेशक जीएस बुढ़ियाल ने दावा किया है कि फिलहाल प्रदेश में घोषित या अघोषित कटौती नहीं की जा रही है और बिजली उपलब्धता पर्याप्त है। विभाग ने गर्मियों से पहले अप्रैल में ही तैयारियां शुरू कर दी थीं तथा जरूरत पड़ने पर खुले बाजार से अतिरिक्त बिजली खरीदने की योजना भी बनाई गई है। काशीपुर स्थित गैस आधारित “गामा” परियोजना से जल्द करीब 75 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे सिस्टम को राहत मिल सकती है।
हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति उतनी सहज नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था मुख्य रूप से जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है और गर्मियों में कई बार नदियों का जलस्तर कम होने से उत्पादन प्रभावित होता है। इसी बीच राष्ट्रीय स्तर पर भी गर्मी के कारण बिजली मांग तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार के अनुसार मई 2026 में देश की पीक पावर डिमांड 229 गीगावाट से ऊपर पहुंच चुकी है।
ऊर्जा प्रबंधन को लेकर UPCL अब तकनीक का सहारा ले रहा है। निगम के निदेशक परिचालन एमआर आर्य के अनुसार आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए हर 15 मिनट में बिजली मांग, केंद्रीय पूल, राज्य पूल और सोलर उत्पादन की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं है, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ती खपत यह संकेत दे रही है कि आने वाले सप्ताह उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। यदि तापमान में और बढ़ोतरी होती है तथा मांग 6.6 करोड़ यूनिट के पुराने रिकॉर्ड को पार करती है, तो बिजली व्यवस्था पर दबाव और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।