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पुण्यतिथि पर लखनऊ, होटल प्रिमियम में खिराजे अक़ीदत (श्रद्धांजलि सभा) का इजलास हुआ, इस कार्यक्रम के मुख्य रूप से आयोजक पीपल जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय

डॉ. अब्दुल जलील फरीदी (14 दिसंबर 1913 – 19 मई 1974)उत्तर प्रदेश के मशहूर मुस्लिम रहनुमा, तबीब, आजादी के सिपाही और समाज सुधारक थे। लखनऊ में वे नामवर टी.बी. और दिल के बीमारियों के स्पेशलिस्ट थे। अमीर खानदान से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने गरीबों का मुफ्त इलाज किया और सारी उम्र मज़लूम तबकात की खिदमत में गुज़ारी।

आज 19 मई 2026 उनकी पुण्यतिथि पर लखनऊ, होटल प्रिमियम में खिराजे अक़ीदत (श्रद्धांजलि सभा) का इजलास हुआ, जिसमें उनकी कुर्बानियों और समाजी इंसाफ के लिए किए गए कामों को याद किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य रूप से आयोजक पीपल जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनाब राशिद जमाल खान साहब रहे!

1973 का ऐतिहासिक कार्यक्रम
1973 में डॉ. अब्दुल जलील फरीदी साहब ने लखनऊ में एक बहुत अहम बैठक और कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसमें दक्षिण भारत के मशहूर समाज सुधारक ई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार) जी को खास तौर पर आमंत्रित किया गया। पेरियार जी द्रविड़ आंदोलन के बुनियादकार और जाति-पात, छुआछूत व ब्राह्मणवाद के सख्त मुखालिफ थे। इस बैठक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और मुस्लिम रहनुमाओं ने शिरकत की।

मुख्य मुद्दे:
🫵 ऊँच-नीच और जाति-पात की जड़ से ख़त्म करने की मुहिम!
🫵सामाजिक तब्दीली और इंसाफ!
🫵वंचित तबकात (अनुसूचित जाति/ जनजाति, पिछड़े और अल्पसंख्यक) के लिए हकूक, तालीम, मकान और माशी इंसाफ!

यह कार्यक्रम मुस्लिम और बहुजन समुदायों के दरमियान राजनीतिक व सामाजिक गठबंधन भागीदारी की बुनियाद रखने की एक अग्रणी कोशिश था। डॉ. फरीदी साहब ने इसी सोच के साथ मुस्लिमों को पिछड़े और अनुसूचित जातियों वर्गों के साथ मिलकर लड़ने की राह दिखाई, जो बाद में बहुजन राजनीति की एक बड़ी प्रेरणा बनी।

वे लखनऊ के उन गिने-चुने रहनुमाओं में थे जिन्होंने हकीकत में बहुजन-मुस्लिम एकता की नींव रखी। उनकी याद आज भी सामाजिक इंसाफ के लिए जद्दोजहद करने वालों को प्रेरित करती है।
अल्लाह उनकी मग़फ़िरत फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए। आमीन।

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