पंचकूला में तहसीलदार समेत 4 अधिकारियों पर FIR, पर्ल ग्रुप की 17.55 एकड़ अटैच जमीन बेचने का मामला
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में (पीजीएफ/पीएसीएल) की अटैच जमीन बेचने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. ब्यूरो की जांच में पता लगा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद 17.55 एकड़ अटैच जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई. नतीजतन जांच टीम ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया है.
पैसा लौटाने के लिए जमीन अटैच: पर्ल ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा अटैच की गई थी. इन संपत्तियों की बिक्री, म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक भी लगी थी. आरोप हैं कि रायपुररानी तहसील में संबंधित अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल मंजूर किए.
नियम-कानून को ऐसे किया गुमराह: ब्यूरो की जांच में पता लगा कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी सुरमुख सिंह द्वारा जीपीए के आधार पर दी गई जमीन के संबंध में हरदीप सिंह ने 22 दिसंबर 2025 को एसडीएम पंचकूला को आवेदन देकर राजस्व रिकॉर्ड से बंदी आदेश हटाने की मांग की थी. फिर पटवारी नरेंद्र कुमार ने तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ मिलकर रिपोर्ट नंबर 232 दर्ज कर जमीन को बंदी आदेश से मुक्त दिखा दिया, जिसके बाद कानूनगो दीपक कुमार ने संबंधित प्रक्रिया को तस्दीक कर दिया.
2 जनवरी 2026 को करोड़ों की रजिस्ट्री: ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 दर्ज की गई थी. इनमें सुरमुख सिंह ने कुनाल छिलाना और सौरभ के नाम कुल 17.55 एकड़ जमीन करीब 4.20 करोड़ रुपये में बेच दी. इसके बाद 9 जनवरी को इंतकाल दर्ज हुआ व 17 जनवरी को कानूनगो और तहसीलदार द्वारा इसे मंजूरी दे दी गई. जांच में पाया गया कि इससे पूर्व संबंधित जमीन को लेकर शिकायतें और पत्राचार हुए थे, जिस दौरान एसडीएम पंचकूला ने तहसीलदार रायपुररानी से स्पष्टीकरण मांगा था. हिसार निवासी एक शिकायतकर्ता ने भी ऐसी जमीनों की बिक्री रोकने का अनुरोध किया था लेकिन अधिकारियों पर कथित तौर पर अनदेखी करने के आरोप हैं.
सरकार से अभियोजन की अनुमति मिली: विजिलेंस जांच में मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत पाया गया. इसके बाद धारा 17-ए के तहत कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति मांगी गई, जिस पर मुख्य सचिव और डीजीपी विजिलेंस से अनुमति मिलने पर अब आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
जमीनी सौदे और रिश्वत मामले में पहले भी जेल काटी: हरियाणा के जिला पंचकूला में पीएसीएल (पर्ल्स) ग्रुप की अटैच जमीन के सौदे में गड़बड़ी और रिश्वत लेने के आरोपों में तहसीलदार विक्रम सिंगला पहले भी जेल जा चुका है. इसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट ने करीब तीन महीने की न्यायिक हिरासत के बाद सख्त शर्तों के साथ जमानत मंजूर की थी. कोर्ट ने 50 हजार रूपये के निजी मुचलके और एक जमानती पर रिहाई देते हुए स्पष्ट किया था कि गवाहों को प्रभावित या सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे. बिना कोर्ट की अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे और पासपोर्ट जमा कराना होगा. इसके साथ ही मामले में हर सुनवाई पर पेश होना अनिवार्य होगा और दो लगातार तारीखों पर गैरहाजिर रहने पर जमानत रद्द हो सकने की चेतावनी भी दी गई थी.
30 जनवरी 2026 को केस दर्ज: विजिलेंस व एंटी करप्शन ब्यूरो पंचकूला में 30 जनवरी 2026 को दर्ज केस के अनुसार आरोप हैं कि तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला ने पीएसीएल ग्रुप की अटैच जमीन का अवैध रजिस्ट्रेशन करवाया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत ट्रांसफर पर रोक के बावजूद यह जमीन रायपुररानी के गांव शाहपुर गांव में बेची गई.