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उलिहातु में भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संदेश दोहराया

भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु में आज श्रद्धा और सम्मान के साथ उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर धरती आबा के संघर्षों और आदर्शों को याद किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक आंदोलन चलाया था। उन्होंने आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकार और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा गया कि बिरसा मुंडा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और संघर्ष के प्रतीक हैं। उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस मौके पर उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए रास्ते पर चलने और समाज में एकता, सम्मान तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश फैलाने का संकल्प लिया।

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