कुर्ला वार्ड 168/A1 में कथित अवैध गेस्ट हाउस निर्माण पर उठे सवाल, स्थानीय नागरिकों ने कार्रवाई की मांग तेज की
मुंबई के कुर्ला इलाके में एक बार फिर कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। कुर्ला एलबीएस रोड स्थित वार्ड नंबर 168/A1 में दरबार होटल परिसर के भीतर कथित रूप से 25 कमरों वाले गेस्ट हाउस के निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति और नियमों का पालन किए बड़े पैमाने पर गेस्ट हाउस तैयार किया जा रहा है, जबकि संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) तथा मुंबई पुलिस प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लोगों ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मनपा प्रशासन और पुलिस विभाग को टैग करते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई है।
बताया जा रहा है कि कुर्ला का यह इलाका पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र माना जाता है। एलबीएस रोड मुंबई की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल है, जहां दिनभर भारी यातायात रहता है। ऐसे में यदि किसी व्यावसायिक परिसर को नियमों की अनदेखी कर गेस्ट हाउस में बदला जा रहा है, तो इससे न केवल स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा बल्कि ट्रैफिक, पार्किंग और कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित परिसर में तेजी से निर्माण कार्य जारी है और अंदरूनी हिस्सों में कई कमरों का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने जांच नहीं की, तो पूरा गेस्ट हाउस शुरू हो जाएगा और बाद में कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
क्षेत्र के कुछ नागरिकों ने दावा किया कि निर्माण स्थल पर लगातार मजदूरों की आवाजाही हो रही है और दिन-रात काम किया जा रहा है। वहीं आसपास के दुकानदारों का कहना है कि इलाके में पहले से ही जगह की कमी है और यदि बड़े स्तर पर गेस्ट हाउस संचालित किया गया, तो इससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में अवैध है, तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक निरीक्षण या कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर निर्माण संभव नहीं है। यही कारण है कि अब लोग पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुंबई में अवैध निर्माण कोई नई बात नहीं है, लेकिन कुर्ला जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस प्रकार के निर्माण को नजरअंदाज करना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे भी पैदा हो सकते हैं।
नागरिकों ने यह भी मांग की है कि संबंधित भवन की सभी मंजूरियों, नक्शों और उपयोग परिवर्तन (Change of User) की जांच की जाए। यदि होटल परिसर को नियमों के विपरीत गेस्ट हाउस में परिवर्तित किया जा रहा है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महानगरपालिका के भवन एवं कारखाना विभाग को तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि क्या फायर सेफ्टी, पार्किंग, आपातकालीन निकासी और संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
मुंबई में बीते वर्षों में कई अवैध निर्माण हादसों का कारण बन चुके हैं। ऐसे मामलों में अक्सर यह सामने आया है कि शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और बाद में बड़े हादसे हुए। इसी वजह से कुर्ला के नागरिक इस मामले में जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कुछ स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पहले भी अवैध निर्माण को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन कार्रवाई अधूरी रह गई। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्त रुख अपनाए, तो अवैध निर्माण पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
क्षेत्रीय नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि किसी व्यावसायिक गतिविधि के लिए इमारत का उपयोग किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों से लाइसेंस और अनुमति लेना अनिवार्य होता है। बिना वैधानिक मंजूरी के गेस्ट हाउस संचालन से सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
मुंबई जैसे महानगर में गेस्ट हाउस, लॉज और होटल संचालन के लिए कई विभागों की अनुमति आवश्यक होती है। इनमें मनपा, अग्निशमन विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य नियामक संस्थाएं शामिल होती हैं। ऐसे में यदि किसी परिसर में बड़े पैमाने पर कमरे तैयार किए जा रहे हैं, तो यह जांच का विषय बनता है कि क्या सभी विभागीय मंजूरियां प्राप्त की गई हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार के निर्माण से आसपास के रिहायशी इलाकों की शांति भी प्रभावित हो सकती है। रात के समय आने-जाने वालों की संख्या बढ़ने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है।
क्षेत्र के लोगों ने यह मांग की है कि निर्माण कार्य की वीडियोग्राफी कराई जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की जाए। यदि कोई नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो निर्माण तत्काल रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में नागरिकों ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई महानगरपालिका से पूछा है कि आखिर 25 कमरों वाले कथित गेस्ट हाउस पर कार्रवाई कब होगी। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य जारी है, तो इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि मुंबई में अवैध निर्माण के खिलाफ समय-समय पर बड़े अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी होती है। ऐसे में आम लोगों का भरोसा कमजोर होता है।
कुर्ला क्षेत्र मुंबई का एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक और आवासीय इलाका माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण सुरक्षा और व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
लोगों का कहना है कि यदि संबंधित निर्माण वैध है, तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी देनी चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। वहीं यदि निर्माण अवैध है, तो तत्काल कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री कार्यालय, मनपा आयुक्त कार्यालय तथा मुंबई पुलिस से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। लोगों की मांग है कि पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करते हैं या नहीं। यदि जांच होती है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य नियमों के तहत हो रहा है या फिर वास्तव में अवैध गतिविधि चल रही है।
फिलहाल क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और स्थानीय नागरिक लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है।