महिला अधिवक्ता हत्याकांड: पुलिस की 'प्रेम और धोखे' की थ्योरी पर उठे गंभीर सवाल, क्या जनदबाव में हुई जल्दबाजी?
रायगढ़। रायगढ़ बार एसोसिएशन की जूनियर अधिवक्ता आराधना सिदार हत्याकांड में पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार कर मामले को सुलझाने का दावा किए जाने के ठीक दूसरे दिन अब इस थ्योरी पर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। अधिवक्ता संघ द्वारा निकाले गए विरोध मार्च और एसपी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद पुलिस ने आनन-फानन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केस सुलझाने का दावा तो कर दिया, लेकिन घटनाक्रम की कड़ियां पुलिसिया कहानी को संदिग्ध बना रही हैं। पूरा मामला तुमीडीह जंगल (Tumidih Jungle) का है, जहां 12 मई 2026 को जूनियर महिला अधिवक्ता का शव बरामद हुआ था।
जेल से रिहाई और प्रेम कहानी में समय का बड़ा फेरबदल
पुलिस थ्योरी के अनुसार, आरोपी लोकनाथ पटेल ने जुर्म कबूल करते हुए कहा है कि मृतिका से उसके प्रेम संबंध थे और शादी का दबाव बनाने के कारण उसने हत्या की। लेकिन इस कहानी का सबसे कमजोर पहलू समय की गणना है। आरोपी स्वयं एक अन्य मामले में पिछले करीब 10 महीने से रायगढ़ जेल में बंद था और इसी साल 28 फरवरी 2026 को ही जमानत पर बाहर आया था।
ऐसे में मात्र दो महीने के भीतर ही मृतिका से पहली मुलाकात होना, फिर गहरी दोस्ती, प्रेम संबंध, शादी का दबाव, विवाद और अंततः हत्या जैसी खौफनाक साजिश को अंजाम दे देनायह पूरी क्रोनोलॉजी कानून के जानकारों और आम जनता के गले नहीं उतर रही है।
आरोपी के बयान और पुलिस के दावों में विरोधाभास
मीडिया के सामने आरोपी ने खुद बयान दिया कि वह पिछले तीन महीने से मृतिका को जानता था। जबकि जेल से उसकी रिहाई को अभी दो महीने से थोड़ा ही ज्यादा वक्त बीता है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि जब आरोपी जेल के भीतर था, तब दोनों के बीच संपर्क कैसे और किस माध्यम से हुआ? क्या दोनों पहले से परिचित थे? यदि हां, तो पुलिस ने इस महत्वपूर्ण पहलू को अपनी शुरुआती विवेचना और प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट क्यों नहीं किया?
क्या भारी जनदबाव में पुलिस ने की जल्दबाजी?
शहर के बुद्धिजीवियों, रायगढ़ बार एसोसिएशन और स्थानीय निवासियों के बीच यह चर्चा बेहद तेज है कि चौतरफा विरोध प्रदर्शन और भारी जनदबाव के बाद पुलिस ने महज केस शांत कराने के लिए जल्दबाजी दिखाई है। मामले में कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभी भी अधूरे नजर आ रहे हैं:
दोनों के मोबाइल फोन की विस्तृत कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन हिस्ट्री क्या कहती है?
जेल के भीतर या बाहर मुलाकातों का कोई ठोस रिकॉर्ड पुलिस के पास है या नहीं?
घटनास्थल तक दोनों किस परिस्थिति में पहुंचे, इसके पुख्ता प्रमाण क्या हैं?
महिला अधिवक्ता की इस संदिग्ध मौत और उसके बाद पुलिस की थ्योरी पर उठते इन तीखे सवालों ने रायगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन अधिवक्ताओं का साफ कहना है कि जब तक हर एक पहलू पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक इसे पूर्ण न्याय नहीं माना जाएगा।महिला अधिवक्ता हत्याकांड: पुलिस की 'प्रेम और धोखे' की थ्योरी पर उठे गंभीर सवाल, क्या जनदबाव में हुई जल्दबाजी?