बदायूं 17मई थाना वजीरगंज गांव बीरमपुर के दंपति दलित जाटव समाज के 14 वर्ष की बेटी बदायूं सैनकी एक माह से पुलिस वजीरगंज नहीं खोज पाई।
बदायूं 17मई थाना वजीरगंज गांव बीरमपुर के दंपति दलित जाटव समाज के 14 वर्ष की बेटी सैनकी एक माह से पुलिस वजीरगंज नहीं खोज पाई तो मां पिता 14 मई मालवीय आवास गृह में धरने पर बैठ गए कितनी संवेदनहीन पुलिस है तीन दिन बीत जाने के बाद भी किसी आला अफसर ने भी शुध नहीं ली मां गीता देवी का बुरा हाल है वे सुध होकर पड़ी रहती है खाना पीना जीने के लिएखा रही है अपनी बेटी की याद में गरीब मजदूर बच्चों को छोड़कर प्रशासन से आस लगाए बैठे थे लड़की के लिए परंतु प्रशासन की नाक के नीचे तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन अपनी पुलिस शैली पर डटा हुआ है लड़की को जमीन लील गई या आसमान में उड़ गई यह पता नहीं लग रहा है 14 अप्रैल से गायब लडकी को नहीं ढूंढ पाई पुलिस माता-पिता की दशा निरंतर खराब हो रही है छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर मजदूर पिता और मां तीन दिन से लगातार आंखें प्रशासन की तरफ आंखें देख रही है की आला अफसर अच्छे दिल के होते हैं वह मेरी बात सुनेंगे और मेरी बेटी को खोज निकलेंगे यह सुना दीवारों तक की ट्रैकों और बसों पर भी लिखा हुआ पड़ा बेटी बचाओ नारे आज बेरंग लग रहे हैं मेरी बेटी नहीं खोज पाई एक माह में पुलिस अब मैं इस दुनिया में जिंदा रहने का हकदार नहीं हूं मेरी बेटी को तीन दिन के अंदर नहीं खोजा गया तो मैं पति-पत्नी भूख प्यास यही प्राण त्याग दूंगा घर वापसी नहीं जाऊंगा बेटी लेकर ही जाऊंगा आखिर पुलिस का काम क्या है उन दरिंदों के पास तक नहीं पहुंच पाई है पिता लाचार बदाम सिंह ने आज रोते हुए बताया जिसका बच्चा एक महीने तक नहीं मिलता है तो फिर उसका हाल क्या होता है आज लाचार हूं गरीब हूं मजदूर हूं मजलूम मेरी पुकार को कोई नहीं सुन रहा है दुनिया भी कैसी है ना कोई अब दलित प्रेमी है ना कोई दलित पार्टी का नेता है ना दलित को अपनाने वाले राजनेताओं में कोई है मेरी फरियाद कोई नहीं सुन रहा है मैंने किसान नेता राजेश कुमार सक्सेना से संपर्क किया है वह खेतों में है उन्होंने कहा है शीघ्र तुम्हारी आवाज को उठाया जाएगा लड़की हर हालत में बरामद की जाएगी आखिर प्रशासन में ऐसी निष्क्रियता क्यों दिखाई है आंदोलन को तेज करूंगा मैं सोमवार को धरना स्थल पर पहुंचूंगा अब मेरे संज्ञान में यह प्रकरण आ गया है दलित समाज की बातें सब करते हैं परंतु इस दलित बेसरा मजदूर की तीन दिन तक बात ना सुनना शर्म की बात ह। संवाददाता राहुल बदायूं उत्तर प्रदेश