खुद जल गई माँ लेकिन चारों बच्चों को अपनी बहादुरी से बचा लिया
प्रयागराज के नैनी में धू धू कर जल रहे मकान से बच्चों को बचाने की कोशिश में एक मां की जान चली गई। भीषण आग और धुएं के बीच वह लगभग आधे घंटे तक अपने तीन बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष करती रही। तेजी से फैल रही आग के बीच उसने एक साल के मासूम को चादर में लपेटकर छत से सामने वाले पड़ोसियों के मकान की ओर बढ़ाया। पड़ोसियों ने किसी तरह हाथ बढ़ाकर बच्चे को सुरक्षित बचा लिया।
इसके बाद उसने अपनी छत से गली के उस पार सामने पड़ोसी की छत तक सीढ़ी लगाकर दो बेटियों को भी सुरक्षित बाहर निकाल दिया। हालांकि, इस दौरान वह खुद आग और धुएं के बीच फंसती चली गई। धुएं के कारण उसका दम घुटने लगा और देखते ही देखते वह आग की चपेट में आकर जिंदा जल गई।
दिल को झकझोर देने वाली ये घटना 12 मई को घटी। जहाँ प्रयागराज के नैनी में एक क्रॉकरी कारोबारी के घर में लगी भीषण आग के दौरान यह दर्दनाक हादसा हुआ था। शनिवार को बच्चों को बचाते हुए जिंदा जली मां की बहादुरी का वीडियो जब से सामने आया है लोग उस माँ को नमन कर उसकी बहादुरी की चर्चा कर रहे हैँ ।
नैनी बाजार के चैंपियन गली में स्थित एक मकान में तीन भाइयों का परिवार रहता है। परिवार की 'संजीवनी क्रॉकरी' नाम से दुकान है। दुकान के सामानों को रखने के लिए घर के फर्स्ट फ्लोर पर ही गोदाम बना हुआ है।
बताया जाता है की 12 मई की रात लगभग 9 बजे शार्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। लोग कुछ समझ पाते इसके पहले आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। चूंकि, घर की महिलाएं और बच्चे ऊपरी फ्लोर पर थे इसलिए वे कहीं निकल नहीं पाए और मकान मे ही फंस गए।
फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन गली सकरी होने के कारण रेस्क्यू में देरी हो गई। नीचे से निकलने का कोई रास्ता नहीं होने पर सभी भागकर छत पर चढ़ गए।
संजीव केसरवानी की भाभी सरिता तो किसी तरह पहली मंजिल से कूद गईं लेकिन संजीव की पत्नी अर्चना,तीनों बच्चे और एक भतीजा मकान के ऊपर वाले फ्लोर पर ही फंस गए। आग फ़ैल रही थी जिस कारण धुआं बढ़ता जा रहा था। आग की तपिश और लपटें छत तक आना शुरू हो गई थीं लेकिन अर्चना ने हिम्मत नहीं हारी।
धू धू कर जल रहे घर के सामने ही lपड़ोसी का मकान था। छत पर पड़ोसी परिवार मदद के लिए पहुंचा था लेकिन किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। अर्चना ने सबसे पहले अपने एक साल के बच्चे को चादर में लपेटा और सामने पड़ोसियों की ओर उछाला। गली के सामने लगभग 12 फीट दूर छत पर खड़े पड़ोसियों ने बच्चे को पकड़ लिया। इस दौरान एक सीढ़ी मिल गई। सीढ़ी को सहारा बनाते हुए उसने अपनी 13 साल और 10 साल की बेटी को पड़ोसी की छत तक सुरक्षित भेजा। इसके बाद उसने अपने भतीजे लव को सीढ़ी से दूसरी ओर भेजा।
बच्चों को सुरक्षित करने की जद्दोजहद में आग पूरी तरह फैल चुकी थी। धुएं और आग की चपेट में अर्चना आ गई। देखते ही देखते आग की लपटों में घिरकर अर्चना बुरी तरह झुलस गई। उधर, फायर ब्रिगेड की टीम भी रेस्क्यू के लिए पहुंच गई।
आग की लपटों के बीच से अर्चना को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अर्चना ने अपनी 13 साल की बेटी को सीढ़ियों के सहारे बचा लिया था लेकिन इस दौरान वह भी झुलस गई थी। उसे भी आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जबकि छत से कूदने वाली भाभी सरिता के पैर में फ्रैक्चर हुआ है।
क्रॉकरी कारोबारी के मकान में लगी आग इतनी भीषण थी कि 12 फायर ब्रिगेड गाड़ियां तड़के 4 बजे तक बुझाती रहीं। रेस्क्यू टीम के अनुसार, गली सकरी होने की वजह से आग पर काबू पाने में दिक्कतें हुई। आग के फैलने का भी डर था।