सरदार की याद लूट के बाद आई: एक राजनीतिक अभिव्यक्ति
गुंगा नाही वो बस मौन था....
जब लूट गया गाव,
तब याद आया "सरदार" कौन था...!
यह एक राजनीतिक अभिव्यक्ति है जिसमें एक व्यक्ति ने गाना या कविता के माध्यम से यह कहा है कि जब उनका गांव लूटा गया, तब उन्हें 'सरदार' की अहमियत महसूस हुई। इस संदर्भ में डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य का उल्लेख किया गया है।
इस अभिव्यक्ति में मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तंज किया गया है। यह किसी विशेष घटना या तथ्य की रिपोर्ट नहीं है बल्कि एक आलोचनात्मक टिप्पणी है जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संदर्भ में कही गई है।