logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

ब्रह्मलीन गुरुदेव रवीन्द्रनाथजी की याद में उमड़ा आस्था का सैलाब; भव्य वरघोड़ा एवं ध्वजा रोहण संपन्न तवाव (जालोर) | विशेष रिपोर्ट: रोनसिंह

## **शरीर शांत, पर साया आज भी साथ: ब्रह्मलीन गुरुदेव रवीन्द्रनाथजी की याद में उमड़ा आस्था का सैलाब; भव्य वरघोड़ा एवं ध्वजा रोहण संपन्न**
**तवाव (जालोर) | विशेष रिपोर्ट: रोनसिंह तवाव (All India Media Association)**
> *"गुरुदेव! आप कहीं गए नहीं, आप तो हमारी हर सांस, हमारे संस्कारों और हर जयकारे में बसे हैं।"*
>
तवाव की पावन धरा पर बीता दिन (14 मई 2026) इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। परम पूज्य, अध्यात्म के तेजस्वी पुंज **श्री श्री 1008 श्री गुरुदेव रवीन्द्रनाथजी महाराज** के देवलोक गमन के वर्षों बीत जाने के बाद भी, उनके प्रति भक्तों की दीवानगी और अटूट आस्था कल तवाव की सड़कों पर साफ दिखाई दी। गुरुदेव भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं, लेकिन उनकी अदृश्य उपस्थिति और आशीर्वाद को हर श्रद्धालु ने अपने भीतर महसूस किया। अवसर था**पावन स्मृति में आयोजित भव्य वरघोड़ा एवं ऐतिहासिक ध्वजा रोहण महोत्सव** का।
### **खाली गद्दी पर विराजीं यादें, नम आंखों से गूंजे जयकारे**
गुरुवार प्रातः 6:30 बजे जैसे ही नीलकंठ महादेव मंदिर और गुरुदेव मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजी, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर में सजी गुरुदेव की खाली गद्दी और उनकी तस्वीर के सामने झुकते हजारों सिर इस बात का प्रमाण थे कि गुरु कभी अपने शिष्यों को अकेला नहीं छोड़ते।
भक्ति संगीत और जयकारों के बीच निकाला गया भव्य वरघोड़ा जिस मार्ग से भी गुजरा, भक्तों ने पलक-पावड़े बिछाकर उसका स्वागत किया। माहौल ऐसा था मानो स्वयं गुरुदेव अपनी मंद मुस्कान के साथ तवाव की गलियों में अपने सेवकों को निहार रहे हों।
### **मुख्य लाभार्थियों ने निभाई सनातन परंपरा**
इस परम पुण्य कार्य के मुख्य लाभार्थी एवं आयोजककर्ता परिवारों में शामिल:
* **आदरणीय श्री देवीचन्द्रजी** (सुपुत्र: स्व. श्री केशरीमलजी सोनी)
* **आदरणीय श्री रामाजी** (सुपुत्र: स्व. श्री रूपाजी चौधरी)
* **आदरणीय श्री वचनाजी** (सुपुत्र: स्व. श्री लाखाजी देवासी)
इन परिवारों ने संपूर्ण श्रद्धा भाव के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के गगनचुंबी शिखर पर भव्य ध्वजा रोहण की रस्म अदा की और सामूहिक मंगल आरती कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
### **36 कौम के प्रबुद्ध जन रहे साक्षी**
इस अलौकिक उत्सव में कौमी एकता और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। कार्यक्रम में श्री मुकेश भुवाजी चौधरी, श्री जोरारामजी देवासी, श्री कैलाश सोनी, श्री दिनेश सोनी, श्री सुरेश सोनी सहित सोनी, चौधरी, देवासी समाज एवं 36 कौम के प्रबुद्ध नागरिकों ने गुरुदेव के चरणों में शीश नवाया।
वहीं, युवा शक्ति से पवन, हिमांशु, रिवु सोनी, जीतू चौधरी, मनीष देवासी एवं समस्त इष्ट-मित्रों की टोली ने व्यवस्थाओं को इतनी खूबसूरती से संभाला कि दूर-दराज से आए अतिथियों ने इसकी जमकर सराहना की।
### **संस्कारों और गौ-सेवा में आज भी 'जीवंत' हैं गुरुदेव**
महोत्सव का समापन जब **"जय गौ माता, जय गोपाल"** के गगनभेदी नारों के साथ हुआ, तो समाज को एक बड़ा संदेश मिला। वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव की असली सेवा यही है कि हम उनके बताए परोपकार, जीव-दया और भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ें। यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक शिष्य का अपने ब्रह्मलीन गुरु के प्रति कभी न मिटने वाले 'जीवंत प्रेम' की साक्षात गवाही थी।
** लेखक/रिपोर्टर: रोनसिंह तवाव**
*(सदस्य: ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन एवं सामाजिक क

5
400 views

Comment