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हरित बिहार की ओर बड़ा कदम: EV नीति 2026 महिला की साइकिल अब इलेक्ट्रिक होगी!

हरित बिहार की ओर बड़ा कदम:

1 लाख कार, 12,000 स्कूटर, 50% टैक्स माफी सम्राट सरकार का 'ग्रीन रिवोल्यूशन' या सिर्फ सब्सिडी का खेल?

विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार


पटना: "जब सरकार एक महिला के हाथ में इलेक्ट्रिक स्कूटर की चाबी देती है तो वह सिर्फ वाहन नहीं देती, स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन देती है।"

वह फैसला जो बिहार को बदल सकता है
बुधवार, 13 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति, 2026 को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
नई नीति के लागू होने से बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

यह नीति PM मोदी की ईंधन बचत अपील और बढ़ते पर्यावरण संकट के बीच आई है और यह सिर्फ एक सरकारी निर्णय नहीं, बल्कि बिहार की परिवहन व्यवस्था का हरित रूपांतरण है।

नीति का पूरा खाका एक नज़र में,
महिलाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन सबसे बड़ा आकर्षण,

परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि नई नीति के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन खरीदने पर प्रति वाहन 1 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वाली महिलाओं को 12,000 की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
यह प्रोत्साहन राशि वर्ष 2026-27 के लिए देय होगी।

यह देश में किसी राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को EV कार पर दी जाने वाली सबसे बड़ी सब्सिडी में से एक है।

सभी वर्गों के लिए EV दोपहिया अनुदान
नई नीति के अनुसार सामान्य वर्ग के लोगों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 10,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 12,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा।

मालवाहक तिपहिया रोजगार का नया इंजन
इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया वाहन खरीदने पर सामान्य वर्ग को 50,000 और SC-ST वर्ग को 60,000 तक का अनुदान मिलेगा।

यह प्रावधान विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी युवाओं के लिए है जो ई-रिक्शा और मालवाहन व्यवसाय में स्वरोजगार करना चाहते हैं।

मोटर वाहन कर में राहत + स्क्रैपिंग बोनस
नई नीति के तहत बिहार में क्रय एवं निबंधित सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी।
साथ ही पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर भारत सरकार की नीति के अनुरूप अतिरिक्त प्रोत्साहन का लाभ भी दिया जाएगा।

EV चार्जिंग बुनियादी ढाँचे की नींव
राज्य सरकार सार्वजनिक एवं निजी चार्जिंग स्टेशनों के विकास को भी प्राथमिकता देगी।

बहुमंजिला भवनों, शॉपिंग मॉल, होटल, मोटल एवं पेट्रोल पंपों में ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। चार्जिंग स्टेशन स्थापना पर सरकार विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराएगी।

PM E-DRIVE योजना के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बनेगा, निजी और अर्ध-सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन भी विकसित होंगे और नागरिकों को अनुदानित दर पर सार्वजनिक पार्किंग की सुविधा मिलेगी।

पुल-कोट:
"2030 तक 10 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत यह सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बिहार की जनता की जेब का भी सवाल है।"

महिला सशक्तिकरण इस नीति का सबसे गहरा आयाम
यह नीति केवल ईंधन बचाने की नीति नहीं यह महिला गतिशीलता की क्रांति है।
बिहार में आज भी लाखों महिलाएं
काम पर जाने के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
स्कूल-कॉलेज जाने के लिए बस और ऑटो का इंतजार करती हैं।
घरेलू काम से बाहर निकलने के लिए पति या भाई की अनुमति माँगती हैं।

सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। परिवहन खर्च में कमी आने से आर्थिक बचत भी होगी।
साथ ही, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और सम्मान में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

एक 12,000 का इलेक्ट्रिक स्कूटर अनुदान यह शायद छोटा लगे। लेकिन जिस महिला के पास कभी अपना वाहन नहीं था उसके लिए यह आकाश की पहली उड़ान है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोहरा लाभ
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने से राज्य में कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी।

सरकार के मुताबिक बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने से वर्ष 2030 तक हर साल करीब 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत होगी।
इससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य में खरीदे और निबंधित होने वाले नए वाहनों में 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया है।

आज बिहार में पटना, गया, मुज़फ्फरपुर जैसे शहर AQI प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। EV वाहनों का बढ़ना इन शहरों को साँस लेने लायक बनाने में मदद करेगा।

ज़मीनी सवाल जो पूछने होंगे
RASUNEWS.in की ज़िम्मेदारी है कि सराहना के साथ जवाबदेही के सवाल भी रखे:

ग्रामीण बिहार में चार्जिंग ढाँचा कब बनेगा?
Sherghati, बांकेबाजार, इमामगंज जैसे क्षेत्रों में अभी बिजली आपूर्ति ही अनियमित है। वहाँ EV चार्जिंग स्टेशन कब तक पहुँचेगा?

DBT क्या हर महिला का बैंक खाता आधार से जुड़ा है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वाहन खरीदने वाले लाभार्थियों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से सहायता राशि भेजी जाएगी।
लेकिन ग्रामीण महिलाओं में बैंकिंग जागरूकता अभी भी सीमित है।

प्रोत्साहन केवल 2026-27 के लिए?
यह प्रोत्साहन राशि वर्ष 2026-27 के लिए देय होगी।
अगर यह योजना सिर्फ एक साल की है तो EV क्रांति कैसे आएगी?
EV वाहनों की सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स?
बिहार के छोटे शहरों और गाँवों में EV वाहनों की मरम्मत और पार्ट्स की उपलब्धता अभी नगण्य है।
किसान और मजदूर वर्ग तक पहुँचेगी यह नीति?
जो सबसे ज़्यादा ईंधन खर्च करते हैं वही सबसे कम जानकार हैं। क्या ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलेगा?

EV चार्जिंग नेटवर्क का जिलावार रोडमैप सार्वजनिक किया जाए विशेषकर ग्रामीण इलाकों के लिए।
प्रोत्साहन की अवधि न्यूनतम 3 वर्ष की जाए एक साल की योजना से क्रांति नहीं आती।

EV मैकेनिक प्रशिक्षण ITI केंद्रों में EV सर्विसिंग कोर्स शुरू हो।ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर योजना की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

महिला स्वयं सहायता समूहों को EV तिपहिया के लिए विशेष ऋण योजना।

अंत में "हरित बिहार, समृद्ध बिहार"
इस नीति से न केवल राज्य को प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक बचत होगी और आम जनता का परिवहन खर्च घटेगा, बल्कि वायुमंडल में लाखों टन कार्बन उत्सर्जन रुकने से वायु गुणवत्ता में भी भारी सुधार होगा।
बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 सही दिशा में सही कदम है। महिलाओं को 1 लाख EV कार सब्सिडी देना एक साहसिक और प्रगतिशील निर्णय है। SC/ST वर्ग को अतिरिक्त प्रोत्साहन समावेशी सोच का प्रमाण है।
लेकिन "हरित बिहार" का सपना तब पूरा होगा जब
Sherghati की महिला के घर के पास चार्जिंग स्टेशन होगा,
बांकेबाजार का युवा EV तिपहिया से रोज़गार करेगा,
और गया की हवा इतनी साफ होगी कि बच्चे खुलकर सास लेगी।

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