नारी शक्ति की नई सुबह:
गया में पालना घर और DHEW को मिले नए कर्णधार,
"डीएम शशांक शुभंकर ने सौंपे नियुक्ति पत्र,
नारी शक्ति की नई सुबह:
विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार
गयाजी: "जब एक कामकाजी माँ यह जानकर घर से निकले कि उसके बच्चे की देखभाल सुरक्षित हाथों में है तो वह सिर्फ काम पर नहीं जाती, वह आत्मसम्मान की राह पर चलती है।"
गया में बदलाव की दस्तक
13 मई 2026 को गया कलेक्ट्रेट में एक ऐसा समारोह हुआ जो सरकारी रस्म नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक जीवंत प्रतिज्ञा थी।
जिला पदाधिकारी गया, श्री शशांक शुभंकर IAS ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अंतर्गत संचालित पालना घर (क्रेश/शिशु देखभाल केंद्र) में चयनित कर्मियों और DHEW (District Hub for Empowerment of Women) के नवनियुक्त Gender Specialist को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
यह महज एक कागज़ नहीं था
यह उन हजारों कामकाजी महिलाओं के लिए आश्वासन था जो रोज़ यह दुविधा लेकर दफ्तर जाती हैं कि "घर पर बच्चा कैसा होगा?"
क्या है पालना घर
और क्यों ज़रूरी है यह?
मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अंतर्गत बिहार में पालना घर (क्रेश) संचालित किए जाते हैं।
यह योजना कामकाजी महिलाओं की सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या
बच्चों की सुरक्षित देखभाल का समाधान करती है।
बिहार में लाखों महिलाएं सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करती हैं।
लेकिन उनके छोटे बच्चों के लिए कोई सुरक्षित, सुलभ और सस्ती देखभाल व्यवस्था नहीं थी।
इसीलिए कई महिलाएं या तो काम छोड़ देती थीं, या बच्चे को अयोग्य हाथों में छोड़कर जाती थीं।
पालना घर इस त्रासदी का जवाब है।
यहाँ प्रशिक्षित क्रेश वर्कर और असिस्टेंट क्रेश वर्कर तैनात होते हैं जो बच्चों को
सुरक्षित वातावरण
पोषण और देखभाल
प्रारंभिक शिक्षा का आधार
प्रदान करते हैं।
गया जिले में पुलिस मुख्यालय परिसर सहित अनेक स्थानों पर पालना घर संचालित हैं।
DHEW महिला सशक्तिकरण का जिला तंत्र
District Hub for Empowerment of Women (DHEW) बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी संरचना है जो महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए काम करती है।
Gender Specialist के रूप में वे व्यक्ति नियुक्त होते हैं जो सामाजिक कार्य, समाजशास्त्र, या महिला अध्ययन में स्नातक हों और जेंडर संबंधी मुद्दों में न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव रखते हों।
Gender Specialist की भूमिका होती है
Mission Shakti और अन्य सशक्तिकरण कार्यक्रमों की निगरानी,
जेंडर बजटिंग में तकनीकी सहयोग,
One Stop Center और हेल्पलाइन से समन्वय, तथा जिले में महिला लाभार्थियों का डेटाबेस रखना।
सरल भाषा में
Gender Specialist वह पुल है जो सरकारी योजना और आम महिला के बीच की खाई को भरता है।
डीएम शशांक शुभंकर का संदेश
शब्द नहीं, संकल्प,
श्री शशांक शुभंकर IAS 3 जून 2025 से गया के जिला पदाधिकारी हैं।
उनके कार्यकाल में यह नियुक्ति समारोह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
डीएम ने नव नियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए तीन मूल बातें कहीं:
"महिलाओं एवं बच्चों के समग्र विकास, सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।"
यह कथन सिर्फ औपचारिकता नहीं यह उस जिम्मेदारी की स्वीकृति है जो राज्य की हर कामकाजी माँ पर सरकार का दायित्व बनाती है।
उन्होंने सभी कर्मियों से "पूरी निष्ठा एवं संवेदनशीलता" के साथ काम करने का आह्वान किया और यह शब्द महत्वपूर्ण हैं।
क्योंकि पालना घर में काम सिर्फ "ड्यूटी" नहीं, एक बच्चे की सुरक्षा और एक माँ का भरोसा है।
कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी और उनकी भूमिका,
इस समारोह की मज़बूती यह थी कि इसमें पूरी महिला-बाल विकास मशीनरी एक साथ उपस्थित थी:
डॉ रश्मि वर्मा (जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, ICDS गया) आंगनबाड़ी नेटवर्क और बाल पोषण की धुरी।
उनकी उपस्थिति यह बताती है कि पालना घर ICDS के साथ समन्वय में काम करेगा।
जयवन्ती सिन्हा (जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम, गया) WCDC के माध्यम से योजनाओं की वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी।
सुशांत आनंद (जिला मिशन समन्वयक, DHEW गया) Gender Specialist की टीम के सीधे पर्यवेक्षक। उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि जेंडर आधारित हिंसा से पीड़ित महिलाओं तक सरकारी सहायता पहुंचे।
पुल-कोट:
"पालना घर सिर्फ एक केंद्र नहीं यह उस सामाजिक अनुबंध का प्रतीक है जो कहता है: 'तुम काम करो, हम बच्चे संभालेंगे।'"
ज़मीनी हकीकत उम्मीद के साथ जवाबदेही,
यह समारोह सकारात्मक है, प्रशंसनीय है। लेकिन एक जागरूक पत्रकार का दायित्व है कि वह सवाल भी पूछे:
क्या पालना घर के कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण मिलेगा?
बच्चों की देखभाल सिर्फ उपस्थिति से नहीं होती उसके लिए प्रशिक्षित हाथ और संवेदनशील मन चाहिए।
क्या Gender Specialist को पर्याप्त संसाधन और स्वायत्तता मिलेगी?
Gender Specialist का मासिक मानदेय 23,000 है यह एक संविदा पद है।
इस राशि में क्या वे उतनी निष्ठा से काम कर पाएंगे जितनी डीएम ने अपेक्षा की?
क्या DHEW के पास पर्याप्त बजट और जनशक्ति है?
DHEW गया का मुख्यालय गया कलेक्ट्रेट भवन में है।
लेकिन गया जैसे विशाल जिले में जहाँ 100 से अधिक प्रखंड और हजारों गाँव हैं एक Gender Specialist काफी नहीं।
महिला सशक्तिकरण संख्या नहीं, संवेदना चाहिए,है
बिहार में महिला सशक्तिकरण की योजनाएं अनेक हैं Mission Shakti, One Stop Center, Nari Shakti Yojana, DHEW लेकिन इनकी सफलता इस पर निर्भर है कि ज़मीन पर काम करने वाले कर्मी कितने सक्षम, प्रेरित और संसाधन-संपन्न हैं।
आज गया में जो नियुक्ति पत्र बांटे गए वे केवल रोज़गार के दस्तावेज़ नहीं हैं। वे उन महिलाओं के प्रति वचन हैं जो हिंसा झेल रही हैं, जो बच्चे को घर पर छोड़कर काम पर जाती हैं, जो यह नहीं जानतीं कि उनके अधिकार क्या हैं।
पालना घर कर्मियों को त्रैमासिक प्रशिक्षण दिया जाए और उनके प्रदर्शन की निगरानी हो।
Gender Specialist की संख्या बढ़ाई जाए गया जैसे बड़े जिले में न्यूनतम 3-5 Gender Specialist होने चाहिए।
संविदा कर्मियों का मानदेय पुनर्विचार हो 23,000 में परिवार चलाना और ज़मीनी काम करना कठिन है।
DHEW की कार्यवाहियों की मासिक सार्वजनिक रिपोर्ट जारी हो जनता को जानने का अधिकार है।
पालना घर की सुविधाओं की नियमित सामाजिक ऑडिट कराई जाए।
अंत में
एक नई शुरुआत को सलाम,
गया की धरती पर आज जो बीज बोया गया वह महिला सशक्तिकरण का बीज है।
डीएम शशांक शुभंकर ने यह समारोह करके केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं निभाई उन्होंने यह संदेश दिया कि जिला प्रशासन इस मिशन को गंभीरता से लेता है।
डॉ रश्मि वर्मा, जयवन्ती सिन्हा और सुशांत आनंद जैसे समर्पित अधिकारियों की टीम इस सपने को हकीकत बनाने की क्षमता रखती है।
अब देखना यह है क्या यह नियुक्ति पत्र एक नई सुबह की शुरुआत है, या बस एक और सरकारी समारोह?
इसका जवाब उन महिलाओं के चेहरे पर मिलेगा जो कल अपना बच्चा पालना घर में छोड़कर निश्चिंत होकर काम पर जाएंगी।
जब एक कामकाजी माँ यह जानकर घर से निकले कि उसके बच्चे की देखभाल सुरक्षित हाथों में है तो वह सिर्फ काम पर नहीं जाती, वह आत्मसम्मान की राह पर चलती है।