देश के घरों में छुपा है 30,000 टन सोना, सरकार ब्याज देकर बैंकों में लाएगी
देश के घरों में छुपा है 30,000 टन सोना, सरकार ब्याज देकर बैंकों में लाएगी
नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो): भारतीय परिवारों का सोने के प्रति अटूट प्रेम अब देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकता है। भारत सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है जिसके तहत घरों में बिना किसी उपयोग के रखा सोना बैंकों में जमा कराया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस सोने पर सरकार आम नागरिकों को सालाना ब्याज (Interest) भी देगी। [1]
सरकार की इस गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) का मुख्य लक्ष्य देश में होने वाले भारी सोने के आयात (Import) को नियंत्रित करना और कीमती विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। [1, 2]
योजना का संपूर्ण ग्राफ़िक ढांचा
योजना से जुड़ी मुख्य शर्तें और नियम (Key Rules)
* न्यूनतम निवेश (Minimum Deposit): योजना का लाभ उठाने के लिए किसी भी व्यक्ति या परिवार को कम से कम 10 ग्राम कच्चा सोना (गहने, सिक्के या बार के रूप में) जमा करना अनिवार्य होगा।
* अनुमानित ब्याज दर (Expected Interest Rate): बैंकों में जमा इस सोने के कुल मूल्य पर सालाना 2.5% से 3% तक का ब्याज दिया जा सकता है।
* समय अवधि (Tenure): सोने को कम से कम 1 वर्ष से लेकर अधिकतम 16 वर्ष तक की अवधि के लिए लॉक किया जा सकता है।
* मैच्योरिटी पर वापसी: निवेश की अवधि पूरी होने पर ग्राहकों को अपना मूल सोना वापस पाने या फिर उसके मौजूदा बाजार मूल्य के बराबर नकद (कैश) लेने का पूरा विकल्प दिया जाएगा। [3, 4]
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आंकड़े जो चौंकाते हैं
* 30,000 टन से अधिक सोना वर्तमान में भारतीय घरों और लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा हुआ है।
* 700 टन से ज्यादा सोने का आयात भारत हर साल विदेशों से करता है।
* 72 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि भारत ने केवल वित्त वर्ष 2025-26 में सोने के आयात पर खर्च की है। [1]
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विशेषज्ञों की चिंता: क्या सरकार को होगा घाटा?
आर्थिक जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें लगातार बढ़ती रहती हैं। यदि कोई नागरिक आज सोना जमा करता है और 3 साल बाद उसे वापस लेता है, तो सरकार को उस समय की बढ़ी हुई कीमतों के हिसाब से भुगतान करना होगा। ऐसे में सरकार को वित्तीय घाटा होने का जोखिम भी बना रहेगा।
हालांकि, इसके विपरीत फायदा यह है कि यदि देश के लोग केवल 2000 टन सोना भी बैंकों में जमा कर देते हैं, तो भारत को अगले तीन साल तक बाहर से सोना मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और देश का अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा कोष बच जाएगा।