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जनता कब तक सिर्फ वादों का रंगरोगन देखती रहेगी???.... 26 वें वर्ष मे चल रहे हैं.

आज के अंसानकारी श्री आनंद राम जी, जिन्होंने पहले सीमाओं पर दुश्मनो से टक्कर ली और दुखद है की आज अपने ही लोगों से अपने पहाड़ और अपने पहाड़ियों के अधिकार के लिए तीसरी बार क्रमिक अनसन पर बैठना पड़ रहा है..... उनका कहना है कि..
मैं इस बात को नकार नहीं सकता कि हमारी चुनी हुई सरकारों ने राज्य के लिए कुछ किया है... किया जरूर है।
हर पार्टी ने घर का आँगन संगमरमर की तरह चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी,
लेकिन सच यह है कि घर आज भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है...
हमारे साथ बने दूसरे राज्य दौड़ते हुए विकास की मंज़िल तक पहुँच रहे हैं,
और हम आज भी पलायन, बेरोज़गारी, बदहाल शिक्षा, चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और टूटी पहचान के बोझ तले दबे हैं।
आँगन चमकाकर वाहवाही लूटना आसान है,
पर असली सवाल है पूरा घर कब बनावोगे....
जनता कब तक सिर्फ वादों का रंगरोगन देखती रहेगी???.... 26 वें वर्ष मे चल रहे हैं.....
अब हिसाब होगा और सवाल भी होंगे.... आपको जवाब भी देने होंगे.
अगर पहाड़ की स्थाई राजधानी पहाड़ में होगी तो सारे प्रसासनिक अधिकारी पहाड़ को सच मे पहाड़ को पहाड़ समझेंगे, पहाड़ मे बैठकर पहाड़ की समस्यायों से रूबरू होंगे और फिर पहाड़ की नीति बनाएंगे... इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शासन और शासक भी सच में पहाड़ को समझेगा, महसूस करेगा और उसी हिसाब से निर्णय लेगा। राजधानी मैदान में होने से अक्सर पहाड़ की समस्याएँ फाइलों तक सीमित रह जाती हैं या पहाड़ से उतर ही नही पाती....लेकिन पहाड़ में राजधानी होने पर जनता की आवाज़ जनता की समस्याएं सीधे सत्ता तक पहुँचेगी।
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, सरकारी दफ्तर, होटल, परिवहन, व्यापार, निर्माण कार्य और छोटे व्यवसायों में स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा।
पलायन रुकेगा जब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाएँ पहाड़ में मिलेंगी, तो लोगों को गाँव छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ेगा.... कोई भी सौक से अपना गाँव घर नही छोड़ना चाहता...... सरकारें मजबूर कर देती हैं उनकी उपेक्षा करके....
सड़क, बिजली, पानी का विकास तेज होगा,राजधानी क्षेत्र को जोड़ने के लिए आसपास के इलाकों में बेहतर बुनियादी ढांचा बनेगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ बढ़ेंगी बड़े अस्पताल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान खुल सकते हैं।
स्थानीय संस्कृति और पहचान मजबूत होगी पहाड़ी भाषा, लोककला, परंपराओं और जीवनशैली को सम्मान मिलेगा।
आपदा प्रबंधन बेहतर होगा पहाड़ में बैठी सरकार जानवरों का अतिक्रमण, जानवरों के छेत्र का अतिक्रमण,भूस्खलन, बादल फटना, सड़क टूटना जैसी समस्याओं पर तुरंत निर्णय ले सकेगी।
जनता की सीधी भागीदारी होगी, दूर-दराज के लोग आसानी से अपनी बात सरकार तक पहुँचा सकेंगे।
राजधानी सिर्फ कहने की नहीं होगी , वह विकास की दिशा का मुख्य द्वारा होगी । अगर राजधानी पहाड़ में होगी, तो विकास भी पहाड़ की तरफ बढ़ेगा और दौड़ दौड़ कर चढ़ेगा......
जय भारत
जय उत्तराखंड
जय पहाड़

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