भ्रष्टाचार का तांडव: रामगढ़-खेड़ा बाढ में सरकारी संपत्तियों पर भू-माफियाओं का खूनी पंजा!
प्रशासन की नाक के नीचे लुटती जन-संपत्ति, क्या कुंभकर्णी नींद
भ्रष्टाचार का तांडव: रामगढ़-खेड़ा बाढ में सरकारी संपत्तियों पर भू-माफियाओं का खूनी पंजा!
प्रशासन की नाक के नीचे लुटती जन-संपत्ति, क्या कुंभकर्णी नींद से जागेगा तंत्र?
रामगढ़/खेड़ा बाढ | विशेष प्रतिनिधि
ग्राम पंचायत खेड़ा बाढ और इसके अधीन आने वाले गांवों में इन दिनों भ्रष्टाचार का ऐसा नग्न नाच देखने को मिल रहा है, जिसने लोकतंत्र की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। रामगढ़ मुराड़ा, जैतपुर, माधोपुरया और तालवृक्ष जैसे गांवों में जनता के खून-पसीने की कमाई (टैक्स) से खड़े किए गए सामुदायिक भवन और सार्वजनिक संपत्तियां आज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं।
सनसनीखेज खुलासा: सरकारी भवन या निजी जागीर?
हैरानी की बात यह है कि जो भवन ग्रामीणों की सामूहिक बैठकों और विकास कार्यों के लिए बनाए गए थे, उन पर आज सफेदपोश रसूखदारों और भू-माफियाओं का कब्जा है। आलम यह है कि सरकारी कागजों में जो इमारतें 'जनता को समर्पित' दिखाई गई हैं, हकीकत में वहां दबंगों ने अपने ताले जड़ दिए हैं। प्रशासन मौन है, मानो भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में हर कोई हाथ धोने में मशगूल हो।
खंडहर बनती करोड़ों की लागत
भ्रष्टाचार की दीमक ने इन भवनों की नींव तक खोखली कर दी है। घटिया निर्माण सामग्री और रखरखाव के नाम पर डकारे गए बजट के कारण ये इमारतें समय से पहले ही जर्जर होकर गिर रही हैं। लाखों-करोड़ों का सरकारी फंड आखिर किसकी जेब में गया? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
जनता का फूटा आक्रोश: "आर-पार की होगी जंग"
स्थानीय ग्रामीणों में अब भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि:
सार्वजनिक चौक और सामुदायिक केंद्रों को 'निजी गोदाम' बना दिया गया है।
शिकायत के बावजूद अधिकारी 'जांच' का झुनझुना थमाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
यदि जल्द ही इन संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया, तो ग्रामीण जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।