नीट-यूजी पर डीएमए इंडिया का बड़ा आरोप पेपर लीक माफिया ने परीक्षा प्रणाली पर कब्जा किया:-डॉ. अमित व्यास
*मई, विक्की हरिंदर पाल:- डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया ) ने NEET-UG 2026 को रद्द करने पर भारत सरकार के फैसले का स्वागत किया है,परंतु सामने आ रहे गंभीर पेपर लीक आरोपों पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। राजस्थान पुलिस SOG से जुड़ी रिपोर्ट्स यह संकेत देती हैं कि देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा एक संगठित पेपर लीक माफिया के कब्जे में पहुंच चुकी है।
कोचिंग नेटवर्क,बिचौलियों, काउंसलिंग एजेंट्स और संगठित गिरोहों के माध्यम से कथित रूप से लाखों रुपये लेकर पेपर सामग्री बेचने की खबरें पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यदि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मेहनत और योग्यता के बजाय भ्रष्टाचार और पैसों के दम पर होगा, तो इसका सीधा खतरा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और आम मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा।
*डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि*
सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना इस राष्ट्रीय स्तर के घोटाले का समाधान नहीं हो सकता। जब तक पेपर लीक माफिया, लाभार्थियों और पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।
हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सज़ा भुगतते हैं।अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव,आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे।अगर अपनी तकदीर परिश्रम से नहीं, पैसे और पहुँच से तय होगा, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?
*डीएमए राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि*
देश के लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, जबकि संगठित गिरोह पैसों के दम पर परीक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। यह केवल परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि देश की मेरिट व्यवस्था पर हमला है।
*डीएमए की झारखंड कोर मेम्बर डॉ. कुमारी रेशु रोली ने कहा कि*
यदि इस मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों का राष्ट्रीय संस्थाओं से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
*डीएमए इंडिया की प्रमुख मांगें:*
1.) घोटाले में शामिल हर व्यक्ति की तत्काल गिरफ्तारी, चाहे उसका राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो।
2.) सीबीआई के माध्यम से समयबद्ध राष्ट्रव्यापी जांच।
3.) सभी संदिग्ध नेटवर्क, डिजिटल सबूतों और वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक जांच।
4.) जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक कर छात्रों का विश्वास बहाल किया जाए।
डीएमए इंडिया ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से मांग की है कि इस मुद्दे को सामान्य विवाद की तरह लेना तुरंत बंद किया जाए।चुप्पी या किसी भी प्रकार का संरक्षण केवल भ्रष्ट नेटवर्क को मजबूत करेगा और लाखों मेहनती छात्रों का विश्वास तोड़ेग