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नीट 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के बाद मोदी सरकार ने दिए सीबीआई जांच के आदेश

3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट (UG) की परीक्षा का रद्द होना इस देश के 24 लाख छात्रों के भविष्य पर किया गया सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रहार है, जिसने मोदी सरकार के उस 'सुरक्षित भारत' के गुब्बारे की हवा निकाल दी है जो हर मोर्चे पर अभेद्य होने का दावा करता था, क्योंकि जब राजस्थान और अन्य राज्यों के परीक्षा केंद्रों से पेपर लीक की खबरें आईं और जांच में यह पुख्ता हुआ कि 'गेस पेपर' के नाम पर माफियाओं ने असली सवाल व्हाट्सएप पर पहले ही बेच दिए थे, तब जाकर इस सोई हुई सरकार ने चौतरफा किरकिरी के बाद परीक्षा रद्द की और अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए सीबीआई (CBI) जांच का आदेश देकर पल्ला झाड़ रही है; सवाल यह उठता है कि जो प्रधानमंत्री अंतरिक्ष में झंडे गाड़ने और सीमाओं को कवच देने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उनके नाक के नीचे बैठा शिक्षा मंत्रालय एक क्वेश्चन पेपर को लॉकर में सुरक्षित क्यों नहीं रख पाया और क्या उनकी 'परीक्षा पर चर्चा' केवल एक मार्केटिंग इवेंट थी क्योंकि धरातल पर तो सिस्टम ने उन गरीब माँ-बाप के बलिदानों के साथ धोखा किया है'। जिन्होंने कर्ज लेकर अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, यह भाजपा सरकार की वह संस्थागत विफलता है जहाँ काबिलियत को नहीं बल्कि माफियाओं की सेटिंग को प्राथमिकता दी गई, और आज जब युवा अपने साल भर की बर्बादी का हिसाब मांग रहा है तो सत्ता के गलियारों में बैठे लोग केवल 'पारदर्शिता' का राग अलाप रहे हैं जबकि हकीकत में इन्होंने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को एक मजाक बना दिया है जहाँ हर बड़ी परीक्षा धांधली की भेंट चढ़ जाती है, इसलिए अब जांच की खानापूर्ति नहीं बल्कि उन जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जिन्होंने अपनी लापरवाही से लाखों युवाओं को मानसिक प्रताड़ना की आग में झोंक दिया है।

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