**सहरा की धूल में ख़ुद को तलाश करता हूँ,**
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**सहरा की धूल में ख़ुद को तलाश करता हूँ,**
**मैं अपने आप से अक्सर सवाल करता हूँ।**
**कहाँ छुपी है वो मंज़िल, कहाँ है वो साया,**
**बस इसी फ़िक्र में ये उम्र ढाल देता हूँ।**
**न कोई हमसफ़र है यहाँ, न कोई राहगुज़ार,**
**मैं ख़ुद को अपनी ही आवाज़ दे देता हूँ।**
**#subhash_dokwal**
**#दुआ_में_याद_रखना**