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"12 मई: वह ऐतिहासिक दिन जब महायोद्धा बंदा वीर बैरागी ने लिया सरहिंद का बदला; वजीर खान के अंत और चप्पर चिड़ी की विजय गाथा पर विशेष शोध

शौर्य और न्याय का ऐतिहासिक दिवस
महायोद्धा बंदा वीर बैरागी ने 12 मई 1710 को रचा था इतिहास; चप्पर चिड़ी की विजय और सरहिंद के न्याय पर विशेष शोध रिपोर्ट जारी
रामनगर (हरियाणा): आज का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 12 मई 1710 को ही महायोद्धा बंदा वीर बैरागी ने चप्पर चिड़ी के मैदान में अत्याचारी वजीर खान को परास्त कर न्याय की स्थापना की थी। यह वही वजीर खान था जिसने मासूम छोटे साहबजादों को जीवित दीवार में चुनवा देने जैसा जघन्य अपराध किया था।
इतिहासकार और लेखक नरेश दास वैष्णव निंबार्क ने अपने नवीनतम शोध के माध्यम से इस गौरवशाली गाथा के अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने रखा है। उनके शोध के अनुसार, 12 मई की यह जीत केवल एक युद्ध की विजय नहीं थी, बल्कि यह अत्याचार के विरुद्ध सनातन धर्म और मानवता की सामूहिक हुंकार थी।
प्रेस नोट के मुख्य बिंदु:
न्याय का विधान: 12 मई 1710 को वजीर खान का अंत कर वीर बंदा बैरागी ने साहबजादों की शहादत का प्रतिशोध लिया।
सैन्य कौशल: शोध में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे एक बैरागी साधु ने अल्प समय में एक विशाल सैन्य शक्ति खड़ी की।
विरासत का संरक्षण: लेखक ने अपनी पुस्तकों और डिजिटल पत्रिका 'सनातन भारत - नया सवेरा' के माध्यम से इस महान योद्धा के सही नाम और पहचान को स्थापित करने का संकल्प लिया है।
लेखक नरेश दास वैष्णव निंबार्क का कहना है कि, "हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह जानना आवश्यक है कि 12 मई का दिन आत्मसम्मान और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। महायोद्धा बंदा वीर बैरागी का बलिदान और उनकी रणनीति आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है।"
इस शोध और ऐतिहासिक दस्तावेज़ों की विस्तृत जानकारी लेखक की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
प्रेषक:
नरेश दास वैष्णव निंबार्क
लेखक एवं स्वतंत्र शोधकर्ता
वेबसाइट: [www.nareshswaminimbark.in]
(जैसे: www.sanatanbharat.com)

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