एक शाम शहीद आशीष स्वामी के नाम कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन-कलमपुत्र काव्यकला मंच ने किया कार्यक्रम
मेरठ/मुज़्फ्रफरनगर - साहित्य और संस्कृति को समर्पित कलमपुत्र काव्यकला मंच एवं पत्रिका के तत्वावधान में श्रीराम गार्डन (जानसठ रोड) गांव लाडपुर, मुज़्फ्ऱप़फरनगर में शुक्रताल निवासी शहीद आशीष स्वामी के 30 वे जन्म-दिवस पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये तथा कवि सम्मेलन आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का सुत्रधार कलमपुत्र काव्यकला मंच मेरठ तथा आयोजक शहीद आशीष स्वामी की वीरांगना शिवि स्वामी थे। कवि सम्मेलन का संचालन मेरठ से पधारे साहित्यकार, पत्रकार एवं इतिहासकार चरणसिंह स्वामी ने किया मुख्यअतिथिबेसिक शिक्षा अधिकारी मुजफ्फरनगर संदीप कुमार जी तथा विशिष्ठ क्षेत्रीय प्रदेश उपाध्यक्ष मानसिंह गोस्वामी, सीओ खतौली रूपाली राय चौधरी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में मेरठ के वरिष्ठ कवि श्री सत्यपाल सत्यम् मंच पर उपस्थित रहे तथा दीप प्रज्वलन सभी अतिथियों ने किया।
कार्यक्रम में कई विशिष्टजनों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिनमें सर्व श्री भाजपा नेता अभिषेक चौधरी, प्रदेश सचिव समाजवादी पार्टी इलम सिंह, अंतवाड़ा गांव के प्रधान सुंदरलाल एडवोकेट राजवीर सिंह, ओमपाल सिंह चौहान, वेदपाल सिंह, भाजपा नेत्री दीप्ति चौधरी, सोनीपत से अनिल कुमार स्वामी, स्वामी राजवीर डागर, स्वामी सुधीर, मुरारी लाल स्वामी, मुनेंद्र जी विपिन ओम प्रमुख हैं।
कवि सम्मेलन का शुभारम्भ मेरठ से पधारी बाल कवयित्री गुंजन स्वामी की सरस्वती वन्दना से हुआ। कवि सम्मेलन में विविध विधाओं के कवियों ने प्रमुख रूप से देशभक्ति की कविताओं से श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए विवश कर दिया। सरस्वती वन्दना के पश्चात कवि कल्पश कपलश ने काव्यपाठ किया। उनके पश्चात कवयित्री व ज्योतिषाचार्या श्रीमती आशा त्यागी प्रभारी ज्योतिष शिक्षा विभाग आई आई एम टी विश्वविद्यालय मेरठ आशीष की वीरांगना शिवि स्वामी के उपन्यास आशिवि (शहीद से एक पत्नी की शिकायत) के विषय में समीक्षा की और शिवि की पुस्तक की विशेषताओं के बारे बताया।
"आशीर्वाद देते हुए उन्होने कहा
बहुत टूटी, बहुत बिखरी मगर मैने हार नहीं मानी।
जमाने के कुंठित इरादों से मगर मैने रार नहीं ठानी ।
अधूरे ख्वाब लेकर भी चली पथरीली राहों पर,
कहाँ गिरी हूँ कहाँ संभली दुनिया मेरा सार नहीं जानी।"
शिवि स्वामी ने आशिवी (शहीद से एक पत्नी की शिकायत) उपन्यास की विशेषताओं तथा इसके लिखने के उद्देश्य बताये। शिवि स्वामी ने कहा कि आज भी समाज में अनेक रूढ़िवादि परम्पराओं और परम्पराओं के कारण विधवाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है, जो अशोभनीय है। इसी के साथ देश की सीमाओं की रक्षा में जो भी व्यक्ति सेना में भर्ती होता है, उसके दिल में देश पर मर मिटने का जज़्बा होता है। इसके बाद वह चाहे सीमा पर शहीद हो या किसी अन्य दुर्घटना में वह हर स्थिति में सम्मान के योग्य है, उसे सरकार एवं समाज के द्वारा बराबर का सम्मान तथा सहायता मिलनी चाहिए। आशिवी ;(शहीद से एक पत्नी की शिकायत) उपन्यास केवल एक उपन्यास नहीं बल्कि शहीदों तथा उनकी वीरांगनाओं को सम्मान एवं सहायता दिलाने हेतु एक मिशन बन गया है।
शहीद आशीष स्वामी के जन्म-दिवस को समर्पित कवि सम्मेलन में कवियों के शब्दों की सुरम्यता, विचारों की ऊँचाई और अभिव्यक्ति की विविधता ने इसे ऊँचाईयों पर पहुँचाया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कवि सत्यपाल सत्यम ने युद्धवीर तैयार रहो, युद्धवीर तैयार कविता से श्रोताओं में चेतना जगाई। कवि रामचन्द वैश्य ने अपनी कविता, शहीदों को शत-शत नमन कर रहा हूं से शहीद आशीष स्वामी को नमन किया।
सतीश सहज जी ने
"अपना बचपन भूल गया था जिस दिन तन पर वर्दी आई"
कवि कल्पश कल्पेश जी ने
"आगे बढ चले जो आंधियों से लड चले।
जो आगे आए सामने तो काल पर भी चढ चले।"
कवि चन्द्र शेखकर मयूर, कवयित्री सरोज दूबे, गुलाब सिंह एवं गुंजन स्वामी ने अपनी कविताओं से समां बांध् दिया।
अन्य प्रमुख कवियों एवं गणमान्य लोगों में जितेंद्र चौधरी सिंह कृष्णपाल स्वामी
उपस्थित रहेे।-