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सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: सैखोवा में तीन दिवसीय 'रंगाली बिहु सम्मेलन' का भव्य आयोजन

सैखोवाघाट: असम की गौरवशाली संस्कृति और परंपरा को संजोए रखने के उद्देश्य से इस वर्ष भी रंगाली बिहु का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ किया जा रहा है। इसी कड़ी में सैखोवा केंद्रीय सार्वजनिक रंगाली बिहु उद्यापन समिति के तत्वावधान और स्थानीय जनता के सक्रिय सहयोग से 12, 13 और 14 मई को सैखोवा मुक्त मंच के परिसर में तीन दिवसीय भव्य रंगाली बिहु सम्मेलन का आयोजन किया गया है। ढोल, पेंपा, गगना और बांसुरी की मधुर धुनों के बीच, एकता और भाईचारे के गीतों के साथ नए परिधानों में सजे युवा इस उत्सव को यादगार बनाएंगे। गौरतलब है कि बिहु न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह असमिया पहचान, उमंग और यौवन का प्रतीक है। समिति का मानना है कि आज के दौर में अपनी परंपराओं को जीवित रखना और बिहु की महान एकता के झंडे को विश्व स्तर पर ऊंचा रखना हर असमवासी का कर्तव्य है।बिहु जाति, धर्म और वर्ण के भेदभाव से ऊपर उठकर सार्वजनिक रूप से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षक हैं ।आयोजक समिति ने समस्त क्षेत्रवासियों से इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होकर 'रंगाली' के उत्सव को सफल बनाने और भाईचारे के संदेश को प्रसारित करने का आह्वान किया है।

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