आओ हम सब मिलकर एक हो जाए विचारों में परिवर्तन करें संगठन कि गरिमा बढ़ाएं संगठित होना ही शक्ति का प्रतीक है
आओ मिलकर हाथ बढाऐ मन के भेद को मिटाए मिटाकर नफरत की दीवार खुशियों का संसार सजाऐ यहां का वहां का यह तो है सब छोटी सोच सब इंसानी को ऊपर वाले ने तो भेजी रूहू में बस प्रेम की सोचअलग-विचारअलग सोच है पर मिट्टी तो एक है अलग बोलियां अलग जिला है पर संस्कृति एक वही जैसे अलग-अलग फूलों से खिलता सुंदर एक चमन है आऔ मिलकर अपना संगठन मजबूत बनाएं दुख में सबके आंसू पूछे सुख में मिलकर खुशियां बनाएं एक दूसरे के उत्सव को मिलकर अपना सुंदर पर्व मनाएं थोड़े कड़वे बोल की बातें दिल में मीठी सोच जगाए सामुदायिक एकता की मिसाल से सारा जग रोशन होकर जाए हाथों में जब हाथ हो अपना शक्ति बढ़ेगी पल पल में मंजिल खुद चल कर आएगी एकता के हर पल में हम अलग नहीं हम एक हैं यही संदेश सुनना है इंसानियत के सच्चे पद पर कम से कदम बढ़ाना है
मास्टर जयपालसिंह दौसा