ममता का रिश्ता; जन्म देने वाली मां ने छोड़ा तो इन यशोदाओं ने लुटाया स्नेह
कहते हैं कि मां सिर्फ जन्म देने वाली नहीं, बल्कि पालने वाली भी होती है। इस मदर्स डे पर हम बात कर रहे हैं धनवाड़ा स्थित राजकीय शिशु गृह और दत्तक ग्रहण केंद्र (Adoption Centre) की उन छह यशोदा माताओं की। जिन्होंने समाज के ठुकराए हुए अनाथ और लावारिस मासूमों को अपनी ममता की छांव दी। जिन बच्चों को उनके जैविक माता-पिता ने तो लावारिस छोड़ दिया, लेकिन इन महिलाओं ने अपनी गोद में समेटा।कड़ाके की सर्दी हो या तपती गर्मी, ये छह आयाएं इन अनाथ बच्चों की परवरिश में अपनी जान फूंक रही हैं। नवजात शिशुओं को समय पर दूध पिलाना, बीमार होने पर रात-रात भर जागकर दवा देना, उन्हें मां जैसा दुलार करना व सुलाना इनकी दिनचर्या है। जब ये बच्चे बड़े होकर किसी परिवार द्वारा गोद लिए जाते हैं, तो इन आयाओं की आंखें खुशी और जुदाई के आंसुओं से छलक उठती हैं। उनसे बिछड़ने का दर्द उन्हें कई दिनों तक रुलाता है। इन आयाओं के साथ राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी धनवाड़ा के सहायक निदेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया, अधीक्षक रविंद्र कुमार मीणा, झालावाड़ मैनेजर कोऑर्डिनेटर दीपक गौतम, सोशल वर्कर मानसिंह भील, मेल नर्स शारिक बेग भी इन बच्चों से इतने घुल-मिल गए हैं कि ये बच्चे ऑफिस में आकर इनके साथ खेलते हैं।जब ये मां बोलते हैं, तो सारा दर्द भूल जाती हूं ^जब कोई नवजात रोता है, तो मेरा दिल तड़प उठता है। मैं उसे तुरंत सीने से लगा लेती हूँ। ड्यूटी खत्म होने के बाद भी घर पर इन्हीं बच्चों का चेहरा घूमता रहता है। जब ये तोतली जुबान से मुझे 'मां' कहकर पुकारते हैं, तो दुनिया की हर खुशी छोटी लगने लगती है। -ललित बाई, आया अपनों ने छोड़ा तो क्या, हम इन्हें कोई कमी नहीं होने देंगी ^झाड़ियों या पालने से जब ये मासूम यहां आते हैं, तो शुरुआत में बहुत डरे होते हैं। मेरा पहला मकसद इन्हें सुरक्षित माहौल देना होता है। मैं इन्हें लोरी गाकर सुलाती हूँ। बीमार होने पर पूरी रात जागकर पट्टी करती हूँ। ये मेरे अपने बच्चे ही हैं। -संजू बाई, आया इनकी किलकारी ही मेरी असली दुनिया है ^इन मासूमों की सेवा करना मेरे लिए नौकरी नहीं, भगवान की पूजा है। इनका पहली बार पलटना, घुटनों के बल चलना, मुस्कुराना असीम सुकून देता है। हर बच्चे की आदत मुझे जुबानी याद है।इनका सुख-दुख अब मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। -सुनीता बाई, आया गोद जाने पर खुशी होती है, पर दिल टूट भी जाता है ^जब कोई बच्चा गोद लिया जाता है। उसे नया परिवार मिलता है। खुशी तो बहुत होती है, लेकिन सच कहूँ तो उस दिन मेरा कलेजा फट जाता है। महीनों तक जिस बच्चे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसे विदा करते समय आँसू रुकते नहीं हैं।-रिंकू बाई, आयाइनकी मासूमियत में ही ममता का असली अर्थ है ^मातृत्व केवल जन्म देने से नहीं आता। इन बच्चों को पालकर मैंने सीखा है कि बिना किसी खून के रिश्ते के भी कितना गहरा प्यार हो सकता है। जब ये छोटे-छोटे हाथों से मेरा आँचल पकड़ते हैं, तो मुझे अपनी ममता पर गर्व महसूस होता है।-पृथ्वी बाई, आया ईश्वर ने मुझे इन अनाथ बच्चों की सेवा का माध्यम चुना^मैं खुद को खुशनसीब मानती हूं कि मुझे इन बेसहारा बच्चों का सहारा बनने का मौका मिला। समाज भले ही इन्हें ठुकरा दे, लेकिन जब तक हम यहाँ हैं, इन्हें कभी अकेलेपन का अहसास नहीं होने देंगे। इनकी हर जरूरत को पूरा करना ही मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।-दीप्ति वर्मा, आया ललिता बाई संजू बाईaimamediajhalawar